नयी दिल्ली : JIO 4जी रोलआउट भारत के इंटरनेट क्षेत्र के लिए “गेम चेंजर” साबित हुआ है। बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में इसका किया गया है उल्लेख। रिपोर्ट में लिखा गया है कि जियो ने किफायती दामों पर यूजर्स को इंटरनेट मुहैया कराया। इससे बड़े पैमाने पर डेटा उपयोग को बढ़ावा मिला। भारत में अब करीब 65 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जो औसतन 12 GB डेटा प्रतिमाह इस्तेमाल करते हैं।
यूनिकॉर्न कंपनियों की आई बाढ़
रिलायंस JIO के लॉन्च के बाद देश में यूनिकॉर्न कंपनियों की बाढ़ सी आ गई। बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में 11 नई भारतीय कंपनियों ने यूनिकॉर्न का तमगा हासिल किया। एक अरब डॉलर से अधिक की मार्केट वैल्यूएशन वाली स्टार्टअप कंपनियों को यूनिकॉर्न कंपनी कहा जाता है। अबतक कुल 37 भारतीय स्टार्टअप कंपनियां यूनिकॉर्न बन चुकी हैं और इनमें से ज्यादातर कंपनियां जियो के लॉन्च के बाद ही अस्तित्व में आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 तक इन कंपनियों की संख्या 100 के करीब पहुंच सकती है।
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JIO की सफलता का बताया राज
रिपोर्ट में बताया गया कि जियो की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि “भारत एक आपूर्ति-बाधित बाजार है और मांग आधारित बाजार नहीं”। जियो ने सस्ती कीमतों पर डेटा और सेवाएं प्रदान करके बाजार के आकार को बढ़ाया है। यूनिकॉर्न कंपनियों को इसका भरपूर फायदा मिला है और अब रिलायंस अपनी “मेड इन इंडिया” 5जी तकनीक को भारतीय बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतारना चाहती हैं।
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