Bokaro : राजाबेड़ा गांव की दोपहर कुछ अलग थी। दामोदर नदी की लहरें आज कुछ ज्यादा ही बेचैन थीं और उन्हीं लहरों में कहीं खो गया बालेश्वर कुमार सिंह, एक युवा, एक बेटा, एक सपना जो शायद चुपचाप बह गया उस नदी की गर्जन में। 35 साल के बालेश्वर, गांव के तुरियो पंचायत के बेलघुटू टोला से थे। बुधवार दोपहर, 11 बजे के करीब, वो नदी किनारे पहुंचे शायद कुछ सोचने, शायद कुछ कहने, या बस लहरों से बात करने। लेकिन दामोदर आज शांत नहीं थी। तेनुघाट डैम के 10 गेट खुले थे और नदी का रौद्र रूप देखकर भी वह ठहरे रहे। किसी ने देखा वह डूब रहे थे। किसी ने आवाज दी, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। जब गांव वाले पहुंचे, वहां सिर्फ गमछे में बंधा एक झोला था, मोबाइल और उनके कपड़े जैसे नदी अपने भीतर कुछ कहानियां समेट चुकी हो। सूचना मिलते ही चंद्रपुरा के बीडीओ, सीओ और थानेदार घटनास्थल पर पहुंचे। गोताखोरों को बुलाया गया है। परिजन बेसुध हैं, और गांव में सन्नाटा पसरा है।
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