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पत्नी से बतियाते-बतियाते ट्रेन में बालम ने ली आखिरी हिचकी…

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Kohramlive : पति से फोन पर बातें कर रानी देवी अपनी खुशी छुपा नहीं सकी, घर का हर कोई यह जान गया कि उसका बालम पूजा में घर आने वाला है, पर उसके माथे पर चिंता की लकीर भी झलक रही थी। वह बार-बार फोन पर हाल-चाल लेती रही। करीब एक माह पहले कमाने परदेश गये रामजीत फोन पर अपनी बीवी को यह बता दिया कि दो-तीन दिन से बुखार है, माथा में बहुत दर्द है, तबीयत ठीक नहीं है। मन बहुत खराब है, पर तेरी आने की पुकार पर ट्रेन में बैठ गया हूं। दिवाली-छठ घर में ही रहूंगा। यह सुन रानी बहुत खुश हो गई, रानी को तब गहरा सदमा लगा, जब उसने अपने पति के डेड बॉडी को घर के आंगन में पड़ा देखा। चादर से ढंके चेहरे को देखते ही वह बेहोश हो गई। कलाई की चूड़ियां टूट गई, मांग की सिंदूर की लाली मिटा दी गई। 12 साल की बड़ी बेटी गौरा और 5 साल का बेटा रावेंद्र और 3 साल का रवि अपने पापा को लगातार पुकारते रह गया, पर पापा हिले-डूले तक नहीं। मां चुन्नी देवी बावरी सी हो गई। मानो, उसे काठ मार गया हो। घर में चीख-पुकार मच गई। पूरा आंगन सूना-सूना हो गया। टाइल्स लगाने का काम करने वाला रामजीत अपनी पत्नी की पुकार पर घर आने के लिये संपर्क क्रांति के जनरल बोगी में सवार हुआ था। साथ में उसका साढू गोर्वधन भी था। रामजीत को अपने घर झांसी आना था। करीब एक माह पहले वह तमिलनाडु गया था।

सफर के डगर में ही नागपुर में रामजीत के माथे में बहुत जोर से दर्द उठा। वह अपनी बर्थ से नीचे गिर गया। साढू और कुछ अन्य मुसाफिरों ने उसे उठा पूछना शुरू किया, क्या हुआ, सब ठीक है ना, पर तबतक रामजीत के प्राण निकल चुके थे। साढू को इस बात का दुख है कि उसने कई दफा रेलवे के हेल्प लाइन नंबर पर फोन किया, पर उधर से कोई रेस्पॉस नहीं मिला। बाद में फोन आया, पर तबतक बहुत देर हो चुकी थी। रामजीत की डेड बॉडी को सीट के नीचे रख दिया गया। लंबा सफर यूं ही बीत गया। सहमे मुसाफिरों ने जब खूब शोर मचाना शुरू किया तो झांसी में GRP और RPF बोगी में आई। डेड बॉडी उतार पोस्टमार्टम को भेजा। मंगलवार को रामजीत की लाश को उसके गांव में लाया गया। उसके घर में छाई खुशियां खत्म हो गई। घर का हर कोई रोने लगे।

कमासिन के लखनपुर गांव में रहनेवाला रामजीत टाइल्स लगाने का काम करता था। लगभग 35 साल के रामजीत के पिता का नाम भैया लाल यादव है। घर की माली हालत बहुत बढ़िया नहीं थी। बच्चों की पेट की खातिर एक माह पहले तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली गया था। अपने साढ़ू गोवर्धन के साथ बीते रविवार को घर आने के लिए संपर्क क्रांति के जनरल कोच में झांसी के लिए बैठे थे। रविवार की रात नागपुर में रामजीत ने आखिरी हिचकी ली।

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