रांची : तंदरुस्त सेहत का एक राज साफ-सफाई को भी माना गया है। कोरोना काल में एक ऐसा उपाय ढूंढ निकाला गया है, जिससे अब रोज-रोज रिम्स के इमरजेंसी वार्ड का बेडशीट बदलेगा। पहले सफेद चादर का इस्तेमाल होता था। रिम्स का इमरजेंसी वार्ड एक ऐसा वार्ड है, जहां ज्यादातर मरीज गंभीर हालत में तो कभी लहू-लुहान पहुंचते हैं। बहते खून और उल्टी बेड तक को गिला कर जाता है। इंफेक्शन होने का बेहद खतरा बना रहता था। अब बेडशीट की जगह डिस्पोजल बेडशीट का इस्तेमाल शुरू हो गया है। ऐसा होने से डॉक्टर, मरीज से लेकर सबका भला। रिम्स से जुड़े और शहर के कई नामी गिरामी डॉक्टर भी मानते हैं कि बेहतर सेहत के लिए साफ-सफाई मायने रखता है। रिम्स की तरह ही बाकी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल को भी डिस्पोजल बेडशीट के इस्तेमाल पर गौर करना चाहिए।
डिस्पोजल बेडशीट की खाशियत यह है कि यह बेड को गंदा नहीं होने देता। बहते खून और पानी या अन्य चीज उपर ही रह जाते हैं। जिसे बेडशीट बदल तुरंत साफ रखा जा सकता है। वायरस का कोई खतरा नहीं, डब्यूएचओ से प्रमाणित है। मुंबई और महाराष्ट्र के ज्यादातर अस्पतालों में अभी इसी डिस्पोजल बेडशीट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अच्छे नतीजे सामने आए। एक बेडशीट की कीमत लगभग 45 रुपये बतायी गई है। बेडशीट के इस्तेमाल के बाद इसको जलाकर नष्ट करने में भी कोई खतरा नहीं। दावा किया गया है कि जलने के बाद भी न तो इससे कोई प्रदूषण होता है और ना ही गंदगी।
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