Kohramlive : आपातकाल के 50 साल’ कार्यक्रम में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने याद किया कि जब 1975 में आपातकाल लगा, वे सिर्फ 11 साल के थे। बोले, “मेरे गांव से 184 लोग जेल गये थे। मैं वो दृश्य कभी नहीं भूल सकता।” शाह ने बताया कि जब देशभर में तानाशाही का अंधेरा था, गुजरात में लोकतंत्र की लौ जल रही थी। लेकिन जल्द ही वहां की जनता सरकार गिरा दी गई। अमित शाह बोले, “कोई खतरा नहीं था, बस सत्ता डोल रही थी।”आपातकाल का कारण कोई राष्ट्रीय आपदा नहीं बल्कि इंदिरा गांधी की कुर्सी का संकट था। न संसद की मंज़ूरी ली गई, न कैबिनेट से बात की गई, सीधे ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा कर दी गई।”
अमित शाह बोले, “भारत की मिट्टी में तानाशाही टिक नहीं सकती। 1977 के चुनाव ने पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार दी और लोकतंत्र फिर जीता। बाबू जगजीवन राम तक को एजेंडा नहीं बताया गया, कैबिनेट की बैठक सुबह 4 बजे बुलाई गई, पर मंत्रियों को एजेंडा तक नहीं बताया गया। ये लोकतंत्र था या दरबारी हुकूमत?” गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि “हम गांव से ट्रक में बैठकर अखबार दफ्तर के बाहर चुनाव नतीजे सुनने पहुंचे थे। रात के 3-4 बजे जब पता चला इंदिरा और संजय गांधी हार गये, वो जोश, वो खुशी आज भी आंखों में है।”









