spot_img

राजधानी रांची में रोग दूर करने का गजब का टोटका, गांव वाले क्या बोले… देखें वीडियो

Date:

spot_img
spot_img

Ranchi(Akhilesh Kumar) : अगर आप किसी गांव की सड़क से गुजर रहे हों और अचानक रास्ते के किनारे टोकरी, सूप, हांडी, झाड़ू और पत्तों का ढेर दिखाई दे जाये, तो चौंकिए मत। यह कोई कचरा नहीं, बल्कि गांव की एक पुरानी परंपरा का हिस्सा हो सकता है। राजधानी रांची से सटे ग्रामीण इलाकों में आज भी एक ऐसी मान्यता जीवित है, जिसे स्थानीय लोग “रोग हांड़ी फेंका” कहते हैं। आधुनिक विज्ञान के दौर में भी यह परंपरा कई गांवों में श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जा रही है।

सामने आई अनोखी परंपरा

यह दिलचस्प नजारा उस वक्त देखने को मिला जब कोहराम लाइव के सीनियर रिपोर्टर अखिलेश अनगढ़ा प्रखंड के जोन्हा मार्ग स्थित हापतबेड़ा गांव में ग्रामीणों की समस्याओं की कवरेज के लिये जा रहे थे। गांव से कुछ दूरी पहले सड़क किनारे दर्जनों महिलायें टोकरी, सूप, हांडी, झाड़ू और पेड़-पौधों की पत्तियां लेकर बैठी थीं। जैसे ही वाहन वहां पहुंचा, महिलाओं ने उसे रोक लिया और स्वेच्छा से सहयोग राशि देने का आग्रह किया।

क्या है ‘रोग हांड़ी फेंका’?

जब महिलाओं से इस परंपरा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह उनके पूर्वजों से चली आ रही एक सामाजिक और धार्मिक परंपरा है। ग्रामीणों की मान्यता है कि इस अनुष्ठान के जरिये गांव और परिवार से बीमारियों, नकारात्मक शक्तियों और संकटों को दूर किया जाता है। महिलाओं ने बताया कि घरों की सफाई के दौरान निकले कूड़े-कचरे, सूखी पत्तियों और झाड़ू जैसी वस्तुओं को एकत्र कर टोकरी या हांडी में रखा जाता है। इसके बाद पूरे गांव की महिलाएं सामूहिक रूप से इन्हें गांव की सीमा या दूसरे गांव की सरहद पर ले जाकर छोड़ देती हैं।

बीमारी नहीं आयेगी, ऐसा है विश्वास

ग्रामीणों का कहना है कि “रोग हांड़ी फेंका” करने से गांव में सालभर गंभीर बीमारियों का प्रकोप नहीं होता और परिवारों पर संकट नहीं आता। अनुष्ठान पूरा होने के बाद गांव में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है और पूरे गांव की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। ग्रामीण इलाकों में यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता का भी प्रतीक माना जाता है। इस दिन गांव की महिलाएं एकजुट होकर पूरे आयोजन को पूरा कराती हैं। हालांकि चिकित्सा विज्ञान बीमारियों की रोकथाम के लिये साफ-सफाई, टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं को जरूरी मानता है, लेकिन ग्रामीण समाज में आज भी कई लोग अपनी परंपराओं और मान्यताओं को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

इसे भी पढ़ें : इंसानियत की सबसे खूबसूरत इबारत…

इसे भी पढ़ें : वोटर बनना है तो जान लीजिये ये नये नियम…

इसे भी पढ़ें : जमीन रजिस्ट्री होगी पूरी तरह डिजिटल, मोबाइल पर मिलेगा रजिस्ट्री डीड का PDF…

इसे भी पढ़ें : पुलिस ने पलट दी बाजी, जंगल में मिला चोरी का ट्रैक्टर…

इसे भी पढ़ें : चेकपोस्ट पर भोर की खामोशी चीर गई गोलियों की ठांय-ठांय…

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

बांके बिहारी मंदिर में ‘गायब’ हुये चांदी के रथ और सिंहासन का दावा…

Kohramlive : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को...

DGP के भाई बोले, वह आत्मह’त्या जैसा कदम नहीं उठा सकते, निष्पक्ष जांच हो…

Kohramlive : त्रिपुरा के DGP अनुराग धनखड़ की सोमवार को...

दुखी बहू ने का’टा ससुर का प्राइवेट पार्ट…

UP : यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में एक पारिवारिक...

सोनम वांगचुक ने बढ़ाया अनशन, बोले, तभी टूटेगा उपवास जब…

Delhi : सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपना...

जनता उतरी सड़क पर तो जागा विभाग… देखें वीडियो

Ranchi(Kuldeep Tiwari) : बरसों से धूल, गड्ढों और उबड़-खाबड़...