Ranchi : जब आसमान आग उगलने लगे और धरती तवे-सी तपने लगे, तब झारखंड के स्कूलों में बच्चों की मासूम हंसी पसीने में भीगने लगी। ये अप्रैल की भट्टी में झुलसता हुआ झारखंड है, जहां सूरज की किरनें अब चुभने लगी हैं और हर सांस में एक बेचैनी सी भर गई है। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय जिनकी आंखों में अपने बच्चों के लिये चिंता है और आवाज में पूरे राज्य के माता-पिता की पीड़ा — उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है। “ये कोई मौसम नहीं स्कूल जाने का… ये तो उन नन्हे कदमों को जलाने का मौसम है,” उन्होंने कहा, जब रांची का पारा 42°C को छू रहा था और बोकारो जैसे जिलों में 46°C तक पहुंच गया। जमशेदपुर, धनबाद, हर शहर जैसे सूरज के कहर में पिघल रहा हो और उन गलियों में स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे, जिन्हें मां सुबह तैयार करती है, अब थके चेहरे और सूखे गले के साथ लौटते हैं।
अजय राय बोले, कि स्कूल का समय बदला जाये सुबह 6.30 से 10.30 तक कर दिया जाये, ताकि गर्मी से पहले ही बच्चों की पढ़ाई पूरी हो जाये और वे सुरक्षित घर लौट सकें। सरकार से अपील है कि इस जलती दोपहर में एक फैसला लिया जाये, जो बच्चों की मासूम हंसी को बचा सके। क्योंकि पढ़ाई जरूरी है, लेकिन उससे पहले – जिंदगी जरूरी है।








