Garhwa(Nityanand Dubey) : प्रशासन की सतर्क निगाहें अब ज़मीनी सच्चाई पर पड़ने लगी हैं। गढ़वा के SDO के नेतृत्व में छह ईंट-भट्ठों का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान दो भट्ठों में नाबालिग मजदूर काम करते पाये गये। जिससे क्षेत्र में तहलका मच गया। ओखरगाड़ा भट्ठे में तीन और गढ़वा के बिकताम भट्ठे में दो नाबालिग बच्चों को काम करते पाया गया। मौके पर मौजूद धावा दल ने तत्काल बच्चों को मुक्त कराया और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। SDO संजय कुमार ने दोनों भट्ठा मालिकों पर FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया और साफ शब्दों में कहा कि अब कोई भी भट्ठा अगर नियमों की अनदेखी करता मिला, तो कठोर कार्रवाई होगी।
ईंट-भट्ठों की मनमानी पर सख्त प्रशासन
गढ़वा में ईंट-भट्ठों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन कई संचालक नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाकर व्यवसाय चला रहे हैं। श्रमिकों को तय मजदूरी न मिलना, मानकों से अधिक ईंटों का उत्पादन, और अब बालश्रम जैसे गंभीर अपराध इस कारोबार के स्याह पक्ष को उजागर कर रहे हैं।
SDO ने निरीक्षण के दौरान भट्ठा मालिकों को सख्त हिदायत दी:
- बाल मजदूरी पर पूर्ण रोक लगाएं, वरना जेल जाने को तैयार रहें।
- खनन विभाग की अनुमति से अधिक उत्पादन करना गैरकानूनी है।
- मजदूरों को श्रम विभाग द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करें।
- भट्ठों का संचालन पूरी तरह नियमानुसार हो, अन्यथा लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा।
ग्रामीणों की चुप्पी और प्रशासन की सख्ती
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ईंट-भट्ठों पर बाल मजदूरों को काम करते देखना आम बात हो गई है, लेकिन डर के कारण कोई अपनी आवाज़ बुलंद नहीं कर पाता। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हर साल नये-नये भट्ठे खुल रहे हैं, लेकिन नियमों का पालन कोई नहीं करता। मजदूरों की हालत खराब है और बच्चों से भी काम लिया जाता है।” अब जब प्रशासन ने सख्ती दिखाई है, तो उम्मीद जगी है कि भट्ठा माफियाओं की मनमानी पर लगाम लगेगी।
आगे क्या?
इस निरीक्षण में SDO के साथ श्रम अधीक्षक संजय आनंद, जिला खनन पदाधिकारी राजेंद्र उरांव, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी अशोक नायक, चाइल्ड हेल्पलाइन परियोजना समन्वयक राजीव कुमार रवि और जिला समन्वयक गणेश कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने संकेत दिये हैं कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में गढ़वा, मेराल, रमना और अन्य इलाकों के सभी ईंट-भट्ठों पर इसी तरह छापेमारी होगी। बालश्रम और अवैध गतिविधियों में लिप्त पाये जाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसना तय है।
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