Ranchi : अपराध के जिस जुर्म में 7 साल से अधिक का सजा का प्रावधान है, उस कांड का खासतौर पर वीडियोग्राफी और फोटग्राफी कराया जाये। वहीं, केस के अनुसंधाकर्त्ता को ई-साक्ष्य ऐप का इस्तेमाल जरूरी तौर पर करना है। यह आदेश आज झारखंड के प्रशिक्षण एवं आधुनिकीकरण की ADG सुमन गुप्ता ने राज्य के सभी पुलिस कप्तानों को दिया। वहीं चेताया कि अगर भविष्य में कोर्ट में प्रतिकूल टिप्पणी की जाती है या खारिज किया जाता है या फिर झूठा केस होने का फैसला सुनाया जाता है तो इसके जिम्मेदारी कांड के अनुसंधाकर्ता पर होगी। उन्हें दंडित किया जायेगा। ADG सुमन गुप्ता ने आज पुलिस मुख्यालय सभागार में वीडियो क्रांफेंसिंग के जरिये तमाम जिलों के पुलिस कप्तानों को ई-साक्ष्य ऐप के इस्तेमाल के तरीके के बारे में बताया। वहीं, ई-साक्ष्य ऐप अपलोड करने के संबंध में पूरी समीक्षा की गई।
इस समीक्षा बैठक में जैप DIG कार्तिक एस, ITNIC रांची के वरीय निदेशक राजीव कुमार सिन्हा, उप निदेशक अनूप रंजन, ICJS के स्टेट को-आर्डिनेटर चितरंजन मिश्रा, SPMU के प्रभारी पुलिस इंस्पेक्टर संदीप कौशिक सहित CCTNS के डाटाबेस एडमिन एवं SPMU के सदस्य मौजूद थे।
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