Kohramlive(Neeraj Thakur) : रेत के समंदर पर चलती बारात का जोश अब धीमा पड़ चुका था। शैतान सिंह के माथे पर बंधी सेहरा अब हवा के झोंकों से फड़फड़ा रहा था, जैसे हर लहर उसे रोकना चाहती थी, “रुक जा, आगे सरहद है। अटारी बॉर्डर के उस पार अमरकोट में, शहनाइयों की धुन पर एक दुल्हन पलकों में हजारों सपने सजाये बैठी थी। सीमा पर तैनात जवान ने नर्मी से कहा, “भाईसाहब, हुक्म आया है। बॉर्डर बंद है। आपको वापस लौटना होगा…” शैतान सिंह की आंखें भर आईं। चार साल का इंतजार, तीन साल का वीजा संघर्ष, दो परिवारों की खुशियां, सब कुछ एक पल में धराशायी हो गया। बारात के साथ आये बच्चे चुपचाप आकाश में उड़ती पतंगों को देखने लगे, जैसे उम्मीद की डोर अब भी किसी चमत्कार का इंतजार कर रही हो…”बापू…” शैतानसिंह ने कांपती आवाज में कहा, “चलो लौट चलते हैं। वतन की खातिर ये कुर्बानी भी मंजूर है।” वहीं, अमरकोट की हवाओं में आज एक अजीब-सी खामोशी थी। जहां हर चौखट पर शहनाइयां गूंजनी थीं, वहां अब सिर्फ सिसकियां थीं। सपना ने अपनी हथेलियों पर लगी मेहंदी को देखा, जिस पर कांपते हाथों से शैतानसिंह का नाम लिखा गया था। पर अब वो नाम भी जैसे सूख कर दरक गया था। सपना की मां, लाल चुनरी हाथ में लिये बैठी थी, वो चुनरी, जो उसकी बेटी के नये जीवन की पहली सौगात थी। पर अब वो चुनरी, सवाल बनकर हवा में लहरा रही थी… “क्या सपनों की भी सरहद होती है?”
गली में चुप्पी पसरी थी। बारातियों का स्वागत करने को सजे द्वार अब वीरान पड़े थे। मेहमान लौटने लगे। हर एक के चेहरे पर अफसोस की एक लकीर खींच गई थी। सपना ने दबी आवाज में पूछा, “अब्बू… क्या अब हमारी मुलाकात कभी नहीं होगी?” अब्बू ने कांपती आवाज में सिर झुका लिया। आंसूओं में भीगते हुये बोले, “बेटी… मोहब्बत की राह में सरहदें बड़ी बेरहम होती हैं…”सपना ने अपनी सूनी हथेली से एक आखिरी बार मेहंदी को छूकर देखा, जैसे दिल में दफन कर रही हो अपनी सबसे प्यारी ख्वाहिश को। उधर, गांव लौटते हुये शैतान सिंह की आंखें बस एक ही तस्वीर में अटकी थीं, सपना की, जो किसी सरहद के पार, सूनी आंखों से उसका रास्ता देख रही होगी। गाड़ी की खिड़की से आती हवा, उसकी पगड़ी के किनारों से खेल रही थी, पर आज वो हवायें भी बोझिल थीं। हर पहिया जो आगे बढ़ रहा था, दिल पर एक नये जख्म की तरह कट रहा था। बारातियों के बीच सन्नाटा था। ढोलक की आवाजें तो कब की थम चुकी थीं, अब बस दिल के भीतर एक कसमसाहट थी, “क्यों प्यार के सामने भी सरहद खड़ी कर दी जाती है?”
#WATCH | Amritsar | Surinder Singh from Rajasthan, who was scheduled to visit Pakistan today for a family wedding, says, “I was going to Pakistan today for my brother’s wedding, but it will be postponed now. My grandmother and her four sons stay in Pakistan, and her one son stays… pic.twitter.com/Irm80PcC9s
— ANI (@ANI) April 24, 2025
गांव पहुंचकर शैतानसिंह ने अपनी पगड़ी उतारी, उसे जमीन पर रखा और आसमान की ओर देखकर बोला, “मैं हार नहीं मानूंगा। जिस दिन सरहद की दीवारें गिरेंगी, उस दिन सपना मेरी दुल्हन बनेगी…चाहे कितने भी तूफान आयें,
हमारा प्यार सरहद से बड़ा होगा।” उसकी आंखों में वो चमक थी, जो हर अंधेरे को चीर देती है। गांव के बुजुर्गों ने सिर झुकाकर उसकी बात सुनी, और दिल ही दिल में दुआ की “काश, मोहब्बत के लिये एक दिन सरहदें भी रास्ता दे दें…” जहां शैतानसिंह के वादे की गूंज सरहद के इस पार थी, वहीं उस पार सपना की आंखों में उम्मीद का दिया टिमटिमा रहा था, एक छत पर बैठी थी सपना आंखें नमी से भरी हुईं, हर झोंके के साथ बस एक सवाल उड़ता, “आयेगा ना?”
(नोटः मीडिया में आई खबरों से मिले इनपुट से तैयार की गई है ये स्टोरी)








