spot_img

रहस्य, आंसू और दहशत की कहानी

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

UP : महानवमी का दिन। गांव में जहां एक ओर देवी की स्तुति गूंज रही थी, वहीं दूसरी ओर निंदुरपुरवा टेपरहा गांव चीखों, धुएं और मौत की सिहरन से कांप उठा। एक ही दिन में छह लाशें दो किशोर, एक किसान, उसकी पत्नी और उसकी दो मासूम बेटियां। गांव के हर दरवाजे पर आज यही सवाल दस्तक दे रहा है, यह नरसंहार था? आत्महत्या? या फिर नवरात्र की आड़ में नरबलि का अंधविश्वास? सुबह सात बजे विजय कुमार मौर्य ने 14 साल के सूरज यादव, 13 साल के सनी वर्मा और किशन यादव (15) को खेत में काम के लिये बुलाया। किशोरों ने महानवमी का हवाला देकर काम करने से इनकार किया। यही इनकार, मानो मौत का न्यौता बन गया। करीब आठ बजे विजय ने किशन को लकड़ी काटने बाहर भेज दिया। लौटने पर किशन ने देखा, आंगन में सूरज और सनी खून से लथपथ पड़े हैं। अंदर से धुएं और चीखों की आवाज आ रही थी। फायर ब्रिगेड ने दरवाजा तोड़ा तो सामने था, विजय (45), उसकी पत्नी धीरज कुमारी (30), बेटियां प्रियांशी (8) और रियांशी (6) की जली हुई लाशें। पुलिस ने मीडिया से कहा कि विजय ने खुद को, पत्नी और बेटियों को कमरे में बंद कर सिलिंडर से आग लगा दी। लपटों से बचने के लिये परिवार टांड़ (दुछत्ती) पर चढ़ा, लेकिन वहां भी मौत ने उन्हें घेर लिया। बाहर ग्रामीणों ने दो किशोरों की लाशें देखीं, एक ही घर में खून और आग का संगम, जिसने गांव की रूह को दहला दिया। घटनास्थल पर पुलिस को सिंदूर और खून से सना अक्षत मिला। ग्रामीण फुसफुसा उठे, क्या यह नवरात्रि के अंतिम दिन नरबलि तो नहीं? हालांकि पुलिस इस आशंका से इंकार कर रही है, लेकिन फोरेंसिक टीम सुबह से देर रात तक रहस्य सुलझाने में नाकाम रही। IG अमित पाठक और SP आरएन सिंह ने मौके का जायजा लिया, ग्रामीणों से पूछताछ की, लेकिन जवाब अब भी अधूरा है। सूरज अपने परिवार का इकलौता बेटा था, उसके शव के पास बैठे दादा गुरुवचन गुमसुम थे, न आंखों से आंसू, न होंठों पर शब्द। पिता लक्षीराम और मां का रो-रोकर बुरा हाल है। विजय मूल रूप से बिहार के भागलपुर का रहने वाला था। 22 साल पहले बहराइच आकर जमीन खरीदी, खेती शुरू की। एक साल पहले बेटे की सड़क हादसे में मौत के बाद से मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी। पत्नी और बच्चियों से आये दिन मारपीट करता था। ग्रामीण बताते हैं, उसका स्वभाव उग्र था, काम भी अजीबो-गरीब करता था।

इसे भी पढ़ें : थानेदार बदला तो बदली तस्वीर, पीड़िता को मिला इंसाफ…

इसे भी पढ़ें : सड़कों पर बढ़ता खतरा, गढ़वा में चिंता की घंटी…

इसे भी पढ़ें : पटना यूनिवर्सिटी में फूटा गुस्सा, छात्रों का आंदोलन तेज…

इसे भी पढ़ें : पानीहाटी में मां का दर्द बना शक्ति,  रत्ना देबनाथ बोली, लड़ाई अभी बाकी है…

इसे भी पढ़ें : बिना हेलमेट वालों पर आफत, 1 महीने में 69 लाख का जुर्माना…

spot_img

Related articles:

थानेदार बदला तो बदली तस्वीर, पीड़िता को मिला इंसाफ…

Hazaribagh : हजारीबाग के बड़कागांव में गुजरे 6 महीने...

सड़कों पर बढ़ता खतरा, गढ़वा में चिंता की घंटी…

Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के समाहरणालय सभागार में सोमवार...

पटना यूनिवर्सिटी में फूटा गुस्सा, छात्रों का आंदोलन तेज…

Bihar : PHD नामांकन को लेकर पटना यूनिवर्सिटी के...

पानीहाटी में मां का दर्द बना शक्ति,  रत्ना देबनाथ बोली, लड़ाई अभी बाकी है…

Kohramlive : कोलकाता की बहुचर्चित आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज...

बिना हेलमेट वालों पर आफत, 1 महीने में 69 लाख का जुर्माना…

Bihar : पश्चिम चंपारण के बेतिया में अप्रैल महीने...