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गढ़वा जेल से एक रिपोर्ट…

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Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा की जेल में रविवार का दिन किसी पर्व से कम नहीं था। नालसा और झालसा के निर्देशन में, और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष नलिन कुमार के मार्गदर्शन में एक ऐसा आयोजन हुआ जिसने बंद दीवारों में बंद उम्मीदों को फिर से जीने की राह दिखाई। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव नीभा रंजना लकड़ा ने कैदियों को न केवल उनके विधिक अधिकारों की जानकारी दी, बल्कि ये भी भरोसा दिलाया कि अगर वो सक्षम नहीं हैं तो भी उन्हें मुफ्त अधिवक्ता, बेल या अपील के लिये मदद दी जायेगी। “न्याय का दरवाजा हर किसी के लिये खुला है, चाहे वो सलाखों के पीछे क्यों न हो।” “न्याय का दरवाज़ा हर किसी के लिए खुला है, चाहे वो सलाखों के पीछे क्यों न हो।” लगभग 240 बंदियों, महिला और पुरुष, सभी की शुगर, बीपी, आंखें और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच हुई। जरूरतमंद को दवायें भी दी गईं। गढ़वा सदर अस्पताल की टीम ने सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भोजन की गुणवत्ता और सफाई पर भी फोकस किया गया। नीभा रंजना लकड़ा ने खाद्य गुणवत्ता, महिला एवं पुरुष वार्डों की सफाई व्यवस्था का भी जायजा लिया। जेल सुपरिंटेंडेंट से लेकर कोर्ट के अधिकारी तक, सबकी निगाह में एक ही सवाल था, “कैद में भी इंसानियत को कैसे जिंदा रखा जाये?” मौेके पर गढ़वा के जेल सुपरिंटेंडेंट सह SDO संजय कुमार, LADCS प्रमुख प्रविन्द साहु, डिप्टी चीफ अनिता रंजन, सहायक सुधीर तिवारी, उत्तम भारती, सदर अस्पताल की मेडिकल टीम, न्यायालय के कर्मठ सहयोगी प्रमोद कुमार दूबे व राजेश कुमार मौजूद थे।

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