Ranchi : बर्फीली वादियों के बीच बसे दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दूसरे दिन भारत की आवाज कुछ अलग ही वजन के साथ गूंजी। आज केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष रमेश कुमार संघवी समेत देश-दुनिया के दिग्गज नीति निर्माता, नामी कंपनियों के CEO और बड़े संस्थागत निवेशक एक ही मेज पर जुटे। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के तत्वावधान में आयोजित इस राउंड टेबल बैठक में सवाल सिर्फ लक्ष्य तय करने का नहीं था, बल्कि यह समझने का था कि सतत विकास को जमीन पर उतारा कैसे जाये और वह भी बिना आर्थिक रफ्तार को थामे।
दुनिया आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की सीमाएं और तकनीकी बदलाव एक साथ चुनौती बनकर सामने हैं। चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि सरकार, उद्योग और निवेशक मिलकर कैसे ऐसे मॉडल गढ़ें, जो विकास भी करें और भविष्य भी बचायें। बैठक के केंद्र में ऊर्जा और अवसंरचना के टिकाऊ समाधान, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी में हरित नवाचार, मानव संसाधन के प्रभावी उपयोग के तरीके, नीतिगत सामंजस्य और प्रबंधन की भूमिका, बिखरे वैश्विक परिदृश्य में दीर्घकालिक मूल्य निर्माण रहे। विशेष जोर इस बात पर रहा कि पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर समाधान को बड़े पैमाने पर कैसे लागू किया जाये। सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल, उत्पादकता बढ़ाने और आपसी समन्वय को मजबूत करने पर भी व्यावहारिक सुझाव सामने आयें।












