Kohramlive : झारखंड के दो युवा चेहरे दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में गर्व से चमक रहे थे। रांची विश्वविद्यालय के दो NSS वॉलिंटियर दीक्षा कुमारी और दिवाकर आनंद, जिन्होंने सेवा को ही जीवन का मंत्र बना लिया, आज उन्हें स्वयं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय NSS पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान झारखंड की मिट्टी के संस्कारों और युवाओं की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। NSS यानी राष्ट्रीय सेवा योजना, वह संस्था जिसने युवाओं को किताबों से उठाकर समाज की गलियों में उतारा है। आज झारखंड में 58,000 से अधिक वॉलिंटियर अपने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से जुड़कर गांवों में परिवर्तन की छोटी-छोटी लौ जला रहे हैं। सिर्फ रांची में ही 10,000 से ज्यादा विद्यार्थी NSS का हिस्सा हैं। दो साल का यह सफर उन्हें सिखाता है कि कैसे पौधा रोपना सिर्फ हरियाली नहीं, उम्मीद लगाना होता है। कैसे स्वच्छता सिर्फ सफाई नहीं, आत्मा की पवित्रता है। कैसे रक्तदान सिर्फ जीवनदान नहीं, मानवता की सबसे बड़ी पूजा है। अब तक झारखंड के 15 कैडेट राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। हर एक सम्मान इस बात की गवाही देता है कि यहां की युवा पीढ़ी सिर्फ सपनों में नहीं, सेवा में जीना जानती है। NSS युवाओं में टीमवर्क, नेतृत्व और संवेदनशीलता के गुण जगाता है, उन्हें सिखाता है कि “बदलाव की शुरुआत किसी और से नहीं, खुद से होती है।”
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