रांची : झारखण्ड के अमर शहीद कीर्ति चक्र विजेता विश्वा केरकेट्टा की बेटी सोनामी केरकेट्टा के सपनों पर ग्रहण लग गया है। शहीद की बेटी अपने पिता के बलिदान का दर्द भूलकर आगे पढ़ना चाहती है। उसने बीएड करने का मन बनाया है, लेकिन उसके पूर्व के शिक्षा संस्थान ने उसका सर्टिफिकेट जब्त कर लिया है और उसे वापस करने के एवज में “कीमत” मांगी जा रही है। बात उपायुक्त तक गयी, सर्टिफिकेट वापसी हेतु फोन से निर्देश दिये गये, पत्र भी जारी किया गया, लेकिन संस्थान का चक्रव्यूह कोई भेद ही नहीं पा रहा। क्या हमारे शहीदों के परिवार के साथ ऐसी नाइंसाफी है। देखिए एक रिपोर्ट।
मेरे बाबा हो गए शहीद, उनका तो मान रखिए
शहीद विश्वा केरकेट्टा की बेटी सोनामी का सर्टिफिकेट देने से प्राचार्या ने किया इनकार
मोतीराज देवी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, ओरमांझी की है प्राचार्या
सर्टिफिकेट वापस करने की मांगी गई “कीमत”
प्राचार्या बोलीं, करियर बर्बाद कर देंगे
डीसी ने फोन किया, लेटर भेजा, कोई असर नहीं
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विश्वा केरकेट्टा के शहीद होने के बाद उनकी बेटी सोनामी केरकेट्टा ने आंसू पोंछ प्रण किया था कि वह बीएड करेगी, लेकिन उसकी राह में रोड़ा अटकाया जा रहा है। मोतीराज देवी टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, ओरमांझी की प्राचार्या ने सोनामी का सर्टिफिकेट ही जब्त कर लिया है। जांबाज की बिटिया ने उनसे कहा, मेरे अरमानों को मत कुचलिए मैडम। मेरा कोई नाथ नहीं। मेरे बाबा शहीद हो गए, उनका तो मान रखिए। इसके विपरीत कॉलेज प्रबंधन को सोनामी का सर्टिफिकेट वापस करने के एवज में कुछ “कीमत” चाहिए।
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20 अक्टूबर 1997 रांची के नामकुम के लाल विश्वा केरकेट्टा ने देश की खातिर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से मरते दम तक लोहा लेते हुए वीर गति पाई थी। उनकी वीरता के लिए उन्हें कीर्ति चक्र से नवाजा गया था। पिता के शहीद होने के बाद बेटी सोनामी ने बीएड करने की ठानी। उसने बाकायदा प्रवेश परीक्षा दी। परीक्षा में चयनित होने के बाद उसकी काउंसिलिंग हुई। उसे मोतीराज देवी टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज में दाखिले के लिए अलॉटमेंट मिला। दाखिले के बाद दूरी एवं अन्य कारणों से उसे आवाजाही मुश्किल लगी, तो उसने दूसरे कॉलेज में दाखिले का मन बनाया। सोनामी ने रांची के डोरंडा कॉलेज की प्राचार्य से बात की, तो उसकी योग्यता एवं उसके शहीद पिता के अमूल्य योगदान को देखते हुए उन्होंने तुरंत हामी भर दी। अपना सर्टिफिकेट वापस मांगने जब सोनामी मोतीराज कॉलेज पहुंची, तो प्राचार्या ने साफ इनकार कर दिया।
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मामला रांची विश्वविद्यालय के कुलपति के पास भी पहुंचा। उन्होंने भी महाविद्यालय को सोनामी के सर्टिफिकेट वापस करने के निर्देश दिए, लेकिन प्राचार्या की हठधर्मिता के कारण आज तक सर्टिफिकेट लौटाया नहीं गया है। सर्टिफिकेट नहीं लौटाने संबंधी सूचना सोनामी ने तत्कालीन उपायुक्त राय महिमापत रे को भी दी थी। डीसी ने तत्काल फोन किया। सर्टिफिकेट वापस करने के लिए लेटर भी जारी किया, लेकिन प्राचार्या ने सर्टिफिकेट वापस करने की जगह, उलटे सोनामी को धमकी दी कि जिसके पास जाना हो जाओ, सर्टिफिकेट वापस नहीं करूंगी। अधिक इधर-उधर करोगी तो बर्बाद कर दूंगी।
इधर मोतीराज देवी टीचर ट्रेनिंग कॉलेज, ओरमांझी की प्राचार्या अनवर जहान ने कहा कि सर्टिफिकेट लौटाने में कोई परेशानी नहीं है। तत्कालीन डीसी साहब के पत्र का मैंने जवाब दिया था और इसके संबंध उन्हें दिशा-निर्देश जारी करने को कहा था।
मामले को तूल पकड़ता देख प्राचार्य बैकफुट पर आ गईं। देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीद की बेटी को कॉलेज प्रबंधन के अहंकार का शिकार होना पड़ा, सवाल ये उठता है कि जब मामले में डीसी के दखल के बाद भी एक शहीद की बेटी को सर्टिफिकेट नहीं मिला तो दूसरे छात्रों का क्या होगा।





