Garhwa(Nityanand Dubey) : न्याय तक पहुंच अब और अधिक सुलभ हो रही है। इसका उदाहरण बना गढ़वा जिला, जहां नालसा (NALSA), नई दिल्ली के निर्देश पर चलाये गये 90 दिवसीय विशेष मध्यस्थता अभियान के तहत 270 मामलों का शांतिपूर्ण निपटारा किया गया। इस विशेष अभियान में 619 मुकदमों को मध्यस्थता के लिए रेफर किया गया था, जिनमें से 270 मामलों में पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से सुलह कराई गई। यह जानकारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष मनोज प्रसाद ने गुरुवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में दी।
कुछ प्रमुख आंकड़े
कुल रेफर मामले: 619
सफल मध्यस्थता: 270
प्रक्रियाधीन मामले: 72
असफल प्रयास (सुलह नहीं हुआ): 112
मध्यस्थता क्यों है खास?
पीडीजे मनोज प्रसाद ने कहा कि “मध्यस्थता एक सुलभ और अंतिम न्याय का मार्ग है, जहां फैसला आपके हाथ में होता है। कोर्ट फीस भी वापस हो जाती है, और अपील की आवश्यकता नहीं रहती।” उन्होंने यह भी बताया कि हालांकि यह विशेष अभियान 1 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक चला, लेकिन मध्यस्थता प्रक्रिया न्यायालयों में सालभर जारी रहती है।
प्री-लिटिगेशन मेडिएशन का बढ़ता महत्व
न्यायाधीश ने जानकारी दी कि कुछ मामलों में अब प्री-लिटिगेशन मध्यस्थता अनिवार्य कर दी गई है। यानी मुकदमा दायर करने से पहले मध्यस्थता की कोशिश जरूरी होती है।
मुफ्त कानूनी सहायता ऐसे लें
टोल फ्री हेल्पलाइन: 15100 (24×7)। जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय, गढ़वा में व्यक्तिगत संपर्क कर सकते है।उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे न्यायालयों में लंबित मामलों के बजाय मध्यस्थता का विकल्प चुनें और समय, पैसा और ऊर्जा की बचत करें। मौके पर डीएलएसए सचिव निभा रंजना लकड़ा भी मौजूद थीं।














