Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के धुरकी थाना क्षेत्र के कदवा भंडार गांव का एक स्याह दिन अब कानून की रोशनी में आ गया है। स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने एक ऐसे दरिंदे को सज़ा सुनाई है, जिसने एक मासूम किशोरी की ज़िंदगी को डर और दर्द में बदल दिया था।
14 साल की एक बच्ची, जो स्कूल से सर्टिफिकेट लेने निकली थी, शाम तक घर नहीं लौटी। मां की बेचैनी घंटों के इंतज़ार में बदलती रही, जब अचानक एक अनजान नंबर से कॉल आया। सामने था सुशील पासवान, उसी गांव का निवासी। मां ने फौरन अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस की तफ्तीश, अदालत की सुनवाई और आठ गवाहों के बयानों ने उस लड़की की चुप चीखों को शब्द दिए। अदालत ने पाया कि बच्ची के साथ न सिर्फ़ अपहरण हुआ, बल्कि उसके साथ दरिंदगी भी की गई। कोर्ट ने सुशील पासवान को दोषी करार देते हुये पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत 20 साल का सश्रम कारावास और ₹25,000 जुर्माना लगाया। धारा 6 के तहत फिर 20 साल का कारावास और ₹50,000 जुर्माना, वहीं भादंवि की धारा 366A के तहत 8 साल की सज़ा और ₹5,000 जुर्माना सुनाया है।हालांकि ये तमाम सजाएँ साथ-साथ चलेंगी, लेकिन हर सज़ा उस बच्ची के आँसुओं की गवाही देती है।कोर्ट ने विक्टिम को मुआवज़ा देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ इंसाफ का पैगाम दिया, बल्कि यह भी जताया कि कानून अब चुप नहीं बैठता खासकर तब, जब किसी मासूम की ज़िंदगी बर्बाद करने की कोशिश की जाये।








