Kohramlive : घर सिर्फ दीवारों और छत से बना ढांचा नहीं होता। वह तो भावनाओं का वह मंदिर है जहां हर कोना, हर दीवार, हमारी यादों, हमारे सपनों और हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है। और जब उस घर के किसी कोने में दीपक की लौ टिमटिमाती है, तो लगता है मानो कोई पुरानी दुआ फिर से सांस लेने लगी हो। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के घर कोने का अपना एक खास महत्व होता है। इसी तरह घर के हर कोने में दीया जलाने का भी वास्तु शास्त्र में वर्णन किया गया है। किस कोने में दीया जलाने का क्या है महत्व… जानें
पूर्व दिशा, जहां से सूरज हर सुबह आशा लेकर आता है
वहीं जब दीपक जलता है, तो उम्र लंबी होती है और अकाल मृत्यु दूर रहती है। यह लौ जीवन में एक नई ऊर्जा, एक नई शुरुआत बनकर आती है।
पश्चिम दिशा, दिन के अंत का प्रतीक
यहां दीपक जलाएं, तो घर की दीवारें सुकून से भर जाती हैं। रिश्तों में प्रेम घुलता है और मन को संतुलन मिलता है, जैसे किसी पुराने गीत की मीठी तान।
उत्तर दिशा, कुबेर का घर —
इस दिशा में दीपक जलाने से बरकत आती है, घर के कोनों में समृद्धि दस्तक देती है। पैसों की तंगी जैसे शर्माते हुये दूर चली जाती है।
दक्षिण दिशा, जहां पितरों की स्मृति बसती है —
यहां की लौ पूर्वजों का आशीर्वाद बन जाती है, और घर की छत के नीचे हर पीढ़ी चैन की सांस लेती है।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व), जहां ईश्वर की उपस्थिति महसूस होती है —
इस कोने का दीपक जैसे आत्मा को सहेजता है। मंदिर की घंटियों की तरह यह लौ आध्यात्मिक ऊर्जा से घर को भर देती है।
आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व), अग्नि का स्थान —
यहां दीपक क्रोध को शांति में बदलता है, चिंता को सुकून में। यहां की लौ जैसे मन के कोलाहल को मौन में बदल देती है।
दीया जलाने का सही समय
जब सूरज ढलता है, और शाम की हवा खिड़की से पर्दे को हल्के से छूती है। वो ‘प्रदोष काल’। बस उसी वक़्त कुछ देर के लिए हर दिशा में दीपक जलाये। तो शायद, कोई अदृश्य शक्ति आपके घर की देहरी पर खड़ी मुस्कुरा रही हो।
डिसक्लेमर : यह आर्टिकल पौराणिक मान्यताओं, वास्तु शास्त्र और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसकी सटीकता की पुष्टि कोहरामलाइव डॉट कॉम नहीं करता।






