Kohramlive : बारिश का मौसम देश के लिये राहत और खुशहाली लेकर आता है। किसानों के लिये मानसून किसी वरदान से कम नहीं होता, क्योंकि भारत की बड़ी आबादी की खेती बारिश पर निर्भर है। लेकिन यही बारिश कई बार विनाश का कारण भी बन जाती है। बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाएं मानसून के दौरान भारी तबाही मचा देती हैं। पहाड़ी इलाकों में अचानक होने वाली बादल फटने की घटनाएं सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होती हैं। कुछ ही समय में इतनी तेज बारिश होती है कि नदियां उफान पर आ जाती हैं और सैलाब जैसी स्थिति बन जाती है। बादल फटना एक प्राकृतिक मौसम संबंधी घटना है। जब किसी छोटे क्षेत्र में बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होती है, तो उसे बादल फटना कहा जाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर किसी इलाके में करीब एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे अधिक बारिश होती है, तो उसे बादल फटने की घटना माना जाता है। यह घटना आमतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि वहां का भौगोलिक स्वरूप बादलों के तेजी से ऊपर उठने और संघनन के लिये अनुकूल होता है।
बादल फटने के पीछे कई प्राकृतिक कारण जिम्मेदार होते हैं—
1. ज्यादा नमी और गर्म हवा का मिलना
जब वातावरण में नमी और गर्मी दोनों का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो गर्म और नम हवा तेजी से ऊपर उठती है। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यह ठंडी हवा के संपर्क में आती है, जिससे जलवाष्प तेजी से पानी की बूंदों में बदलने लगती है। इसके परिणामस्वरूप अचानक बहुत तेज बारिश होने लगती है।
2. पहाड़ी इलाकों का प्रभाव
पहाड़ों में हवा ढलानों से टकराकर तेजी से ऊपर उठती है। ऊपर जाकर यह ठंडी होती है और बादलों का निर्माण होता है। जब इन बादलों में बहुत अधिक नमी जमा हो जाती है और वातावरण में बदलाव आता है, तो अचानक भारी बारिश शुरू हो सकती है।
3. गर्म और ठंडी हवाओं का टकराव
जब गर्म और ठंडी हवाएं एक-दूसरे से टकराती हैं, तो बादलों में अस्थिरता बढ़ जाती है। कई बार यही स्थिति बादल फटने जैसी घटनाओं को जन्म देती है।
क्यों पहाड़ों में ज्यादा आती है तबाही?
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों में बादल फटने की घटनाएं ज्यादा दर्ज की जाती हैं। पहाड़ों में ढलान होने के कारण तेज बारिश का पानी तेजी से नीचे की ओर बहता है। इससे अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन जाती है। कुछ ही समय में घरों को नुकसान पहुंच सकता है, सड़कें टूट सकती हैं, नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जान-माल की भारी क्षति हो सकती है।
कौन से बादल बनते हैं बादल फटने का कारण?
बादल फटने की घटनाओं में अक्सर क्यूम्यूलोनिंबस (Cumulonimbus) बादल जिम्मेदार होते हैं। ये बादल बहुत ऊंचाई तक विकसित होते हैं और इनमें बड़ी मात्रा में पानी जमा हो सकता है। जब इन बादलों में मौजूद पानी अचानक नीचे गिरता है, तो भारी बारिश और तेज बहाव की स्थिति बनती है।
बारिश की बूंदें कैसे बनती हैं खतरनाक?
वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनुसार, बादलों के अंदर मौजूद छोटी-छोटी पानी की बूंदें आपस में टकराकर बड़ी बूंदों में बदल जाती हैं। इस प्रक्रिया में बड़ी बूंदें तेजी से नीचे गिरती हैं और कुछ ही समय में बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है। इसे मौसम विज्ञान में लैंगमुइर प्रेसिपिटेशन प्रक्रिया से भी जोड़ा जाता है। बादल फटना पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे रोका नहीं जा सकता। लेकिन मौसम की जानकारी, समय पर चेतावनी और आपदा प्रबंधन की तैयारी से इसके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आसमान से बरसती बारिश जब अचानक रौद्र रूप ले लेती है, तो वही जीवनदायिनी बूंदें कुछ ही पल में तबाही का कारण बन सकती हैं।
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