Kohramlive : हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। यह हर साल कार्तिक माह की शुक्ल द्वादशी को मनाया जाता है, जब माता तुलसी का विवाह शालिग्राम भगवान से किया जाता है। शालिग्राम भगवान को विष्णु का रूप माना जाता है और तुलसी माता को प्रकृति का। पंचांग के मुताबिक इस बार यह 2 नवंबर को मनाया जायेगा।
तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:59 – 05:49 बजे
अमृत काल: 09:29 – 11:00 बजे
अभिजित मुहूर्त: 11:59 – 12:45 बजे
गोधूलि मुहूर्त: 18:04 – 18:30 बजे
इन शुभ मुहूर्तों में तुलसी विवाह किया जा सकता है।
पूजन विधि
मंडप फूल और साड़ियों से सजाया जाता है। तुलसी माता और शालिग्राम की प्रतिमा को स्नान कराकर फूल-माला पहनाई जाती है। तुलसी का सोलह श्रृंगार और शालिग्राम को धोती पहनाई जाती है। अंतिम चरण में दोनों को पवित्र धागे से बांधकर विवाह संपन्न किया जाता है।
महत्त्व
यह उत्सव ईश्वर और प्रकृति के बीच सामंजस्य का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और खुशहाली आती है। तुलसी विवाह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा की जीवंतता का प्रतीक भी है।
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