Kohramlive : रियासत की हवायें भी उसके नाम से सहम जाती थीं। राजमहल के विशाल कंगूरे, संगमरमर से जड़े दरवाजे और नक्काशीदार झरोखे उसकी शान के गवाह (Trending News) थे। लेकिन उसके दिल में कोई युद्ध नहीं था, न ही कोई फतेह का सपना… उसकी चाहत थी—बस लजीज पकवान! गुजरात सल्तनत के सुल्तान मोहम्मद बेगड़ा… एक ऐसा नाम, जिसकी भूख की कहानियां पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती हैं। कहते हैं कि वह अकेले 37 किलो खाना खा जाता था! सुबह की पहली किरण के साथ ही उसकी दस्तरख्वान सज जाती थी—एक कटोरी शुद्ध मक्खन, एक प्याला शहद और पूरे 150 केले! यह तो बस शुरुआत थी… दिनभर तरह-तरह के व्यंजन उसके सामने परोसे जाते और महल की रसोई में कभी आग ठंडी नहीं पड़ती थी।
रात को जब महल गहरी नींद में डूब जाता, तब भी उसके सिरहाने पकवानों की थालियां सजाकर रखी जातीं। कहीं ऐसा न हो कि सुल्तान को आधी रात में भूख लग जाये, उन्होंने खुद हुक्म जारी कर रखा था—अगर नींद में भी कोई ख्वाहिश जाहिर हो, तो उसे फौरन पूरा किया जाये। यही नहीं, बचपन से ही वह जहर की छोटी-छोटी मात्रा लिया करता था, जिससे उसका शरीर जहर का आदी हो गया था। लोग कहते थे कि अगर कोई उसे काटे, तो जहर काटने वाले के शरीर में दौड़ जाये। उसकी कहानी जितनी अनोखी थी, उतनी ही रहस्यमयी भी। क्या वह स्वाद का दीवाना था या फिर महलों की वीरानियों में अपने अकेलेपन को इस तरह मिटाता था? यह तो इतिहास ही जानता होगा, लेकिन एक बात तय है—गुजरात की फिजाओं में आज भी उसकी भूख के अफसाने तैरते हैं।
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