Palamu : पलामू के नावाबाजार के महफूज आलम ने रिम्स में आखिरी हिचकी ली। उसे लूटकांड का आरोपी बताया गया था, अब इस दुनिया में नहीं रहा। रिम्स के ठंडे बिस्तर पर उसकी सांसे थम गईं, लेकिन उसके परिवार की चीखें अब भी गूंज रही हैं। महफूज आलम को बीते 5 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। लूट के आरोप में पांकी पुलिस ने उसे जेल भेजा। लेकिन कुछ ही दिनों में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और इलाज के लिये उसे रिम्स लाया गया। वहां, पूरे 18 दिनों तक वह जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा, लेकिन रविवार को उसकी सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया।
परिजनों का इल्जाम
महफूज के घरवाले पुलिस पर सीधा आरोप लगा रहे हैं—”उसे पीट-पीटकर मार दिया गया।” उनका दावा है कि पुलिस ने बीते 1 मार्च को ही उसे पकड़ लिया था और बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई। मामला इतना तूल पकड़ चुका था कि विधानसभा तक गूंज उठा और नतीजा ये हुआ कि नावाबाजार के थानेदार को सस्पेंड कर दिया गया। परिवार वालों ने मीडिया को बताया कि वे हार नहीं मानी। उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। नावाबाजार और पांकी थानेदार सहित कई पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाये गये हैं। अदालत ने 19 मई को सुनवाई की तारीख तय की है। इधर, महफूज आलम की मौत के बाद अब पूरा प्रशासन हरकत में आ गया है। शव का पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जायेगी।








