spot_img
spot_img
spot_img

मांओं की आस्था की जितिया लोककथा… जानें

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Kohramlive : झारखंड/मगध/कोसी की धरती पर गांव की गलियों से लेकर शहर की चौपालों तक, हर ओर एक ही स्वर गूंज रहा है, “जितिया मंइया की जय”। 14 सितम्बर को जितिया व्रत है। यह सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि ममता और मन्नत का संगम है। मां दिनभर निर्जल उपवास रखती है। होंठ सूखते हैं, गला प्यास से तरसता है, लेकिन आंखों में अपने लाल के लिये अनगिनत सपनों की चमक रहती है। वह भूखी रहकर भी तृप्त है, क्योंकि उसकी तपस्या बेटे की उम्र से जुड़ी है। यह वही जज्बा है, जिसने सदियों से मातृत्व को अमर बना दिया है। हर आंगन में आंचल पसारे हर मां जैसे कह रही हो, “हे सूरजदेव, मेरी संतान की उम्र सात समुद्र पार ले जाओ।” गांव की औरतें मिलकर लोकगीत गाती हैं, “जितिया मइया हमार बेटवा के रखिहु निरोग।”

त्याग की तपस्या, उमंग का उत्सव

यह व्रत सिर्फ तप नहीं, उत्सव भी है। घर-घर में भोर होते ही नदी-तालाब पर स्नान का दृश्य, सूखी बांसुरी पर बजती लोक धुन और माटी की गंध से सराबोर सुबह, ये सब मिलकर जितिया को लोक-आस्था का सबसे जीवंत पर्व बना देते हैं। मांओं की आंखों में आज बस यही दुआ रहती है कि “मेरे बच्चे को कभी दुख न छुये, उसकी उम्र लंबी हो, सुख से भरी हो।” जितिया व्रत मातृत्व का वो गीत है, जो हर पीढ़ी की मां गाती रही है। यह गीत कभी पुराना नहीं होता, क्योंकि ममता की धड़कनें कभी बूढ़ी नहीं होतीं। एक बुज़ुर्ग दादी कहती हैं, “बेटा, हम भूखे रहके भी पेट भरल महसूस करितानी। जे भोज मेरे लाल के जिनगी बढ़ा दे, उहे भोज सबसे बड़ा।”

जितिया कथा 

कहते हैं, बहुत पुराने जमाने में जीउतवाहन नामक एक तपस्वी नदी किनारे तपस्या कर रहे थे। उनकी साधना से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें अमरता का वरदान दिया। तभी ये कथा आस्था का दीप बन गई। कहानी आगे बढ़ती है श्यामा और जमुन से, दो बहनें। श्यामा ने पुत्र के लिये जितिया का कठोर व्रत किया। जमुन ने हंसते हुये कहा, “ये सब तपस्या किस काम की? भूखे रहने से भला संतान कैसे सुखी होगी?” लेकिन समय का पहिया घूमा। जमुन का पुत्र दुर्भाग्य का शिकार हुआ। श्यामा ने ममता से लिपटे हुये व्रत की महिमा से अपने पुत्र को सुरक्षित रखा। लोककथा कहती है, श्यामा के व्रत ने, उसकी भूख और तपस्या ने, उसके पुत्र को वही जीवनदान दिलाया जो जीउतवाहन के अमर वरदान से जुड़ा था।
तभी से यह व्रत मान्यता बना, “जो मां जितिया करेगी, उसका पुत्र अमर-सुखी और निरोग रहेगा।”

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

रांची के इन इलाकों में कल रहेगी बिजली गुल, कितने घंटे… जानें

Ranchi : झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने...

भारत की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान, मोदी के रहते…

Kohramlive : फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के...

रांची के सभी स्कूलों में चलेगी ये पाठशाला…

Ranchi : रांची में करीब 1.45 लाख विद्यार्थियों का...

घर की कहासुनी सड़क पर खू’नी वारदात में बदली, बेटा बोला, ‘कोई पछतावा नहीं’…

UP : जिस बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, जिस...

ओरमांझी CHC की एक्स-रे मशीन खराब, दर्द लेकर भटक रहे मरीज… देखें वीडियो

Ranchi(Kuldeep Tiwari) : सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा...