Chaibasa : सदियों से जंगलों की गोद में पलने वाली मासूमियत पर इस बार अंधेरे ने हमला किया… पश्चिमी सिंहभूम के कुमारडुंगी में एक 13 साल की नाबालिग बच्ची की ज़िंदगी उस वक्त थम गई, जब भरोसे के नाम पर उसे दरिंदों के हवाले कर दिया गया। जिन दो लड़कों से हाल ही में उसकी जान-पहचान हुई थी, उन्होंने भरोसे का मुखौटा पहन कर उसे मोटरसाइकिल पर बैठाया ये कहकर कि मौसी के घर छोड़ देंगे… लेकिन सड़कें जहां जाती हैं, वहां हमेशा घर नहीं होते।
उस दिन जंगल ने चीखें सुनीं और रात ने एक मासूम की आत्मा की चीख को अपने भीतर समेट लिया। चार लड़कों ने मिलकर उसकी अस्मिता को रौंदा। अगले दिन, जैसे कुछ हुआ ही न हो। वे उसके लिए नये कपड़े लाये, बस में बैठाया और चले गये। लड़की ने जब विरोध किया, तो उसे चुप करा दिया गया — मुंह दबा दिया और जान से मारने की धमकी दी गई। पिता का मोबाइल भी उससे छीन लिया गया… लेकिन एक मां का आंचल सबकुछ जान लेता है। घर पहुंचते ही पीड़िता ने मां को सबकुछ बताया। फिर जो आंसुओं में बहा, वह इंसाफ की पुकार थी।
थानेदार विनोद पासवान और दिलीप मांझी घटनास्थल पर पहुंचे। फटे कपड़े, टूटी आवाज़ और एक जर्जर आत्मा – यही सबूत थे उस दरिंदगी के। पुलिस ने चार आरोपियों पर पोक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया है और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।








