Ranchi : रांची की मिट्टी में गुरुवार को तब एक नई ताजगी घुल गई, स्वास्थ्य विभाग अपर मुख्य सचिव अजय कुमार ने 8वें राष्ट्रीय पोषण माह का राज्यस्तरीय शुभारंभ किया। मंच पर झारखंड की रसोई की खुशबू थी और महिलाओं की शक्ति का संदेश था। अजय कुमार ने कहा कि पोषण से भरपूर झारखंडी व्यंजनों का इंपैक्ट ग्लोबल होना चाहिये। इन व्यंजनों को बनाने की विधि सोशल मीडिया पर डालें, ताकि देश-दुनिया तक यह स्वाद और सेहत पहुंचे। झारखंड की 100 से भी ज्यादा पारंपरिक डिशेज जिनमें ग्रामीण महिलाओं का हुनर झलकता है, अब ग्लोबल प्लेट की ओर बढ़ रही हैं।
स्वस्थ नारी = सशक्त परिवार
अभियान की सबसे बड़ी ताकत आंगनबाड़ी सेविकायें और सहिया दीदी रही। उनका मिशन है महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाना, जांच कराना और मुफ्त दवा उपलब्ध कराना। यह कार्यक्रम हमारी माताओं और बहनों पर केंद्रित है। उनकी सेहत ही परिवार और समाज की असली ताकत है। शिशु मृत्यु दर और मातृत्व मृत्यु दर में राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति है, लेकिन संस्थागत प्रसव में सुधार की जरूरत है, पोषण माह में रोजाना 4000 कैम्प लगेंगे। संदेश साफ है, थाली में कम चीनी, कम मैदा, कम तेल और ज्यादा हरी सब्ज़यां व रंग-बिरंगे फल। मनोज कुमार ने कहा कि बिना स्वस्थ महिला के स्वस्थ भारत और स्वस्थ झारखंड की कल्पना नहीं की जा सकती। आधी आबादी के स्वास्थ्य को संवारना ही हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं से अपील की कि वे महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्रों तक ले जाएं और प्राथमिक जांच से लेकर जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल तक मार्गदर्शन करें।
पुरस्कार और प्रेरणा
खूंटी और रामगढ़ की सहायिकाओं को 21 हजार और 10 हजार रुपये का चेक देकर सम्मानित किया गया। लोकल फूड व्यंजन प्रतियोगिता” में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए यह इनाम न सिर्फ उनकी मेहनत का, बल्कि झारखंडी परंपरा का सम्मान है। पोषण की पांच सूत्री और पहले हजार दिन पर पोस्टर का विमोचन भी किया गया। गांव की चौपालों से लेकर रांची के मंच तक, झारखंडी व्यंजन अब दुनिया के लिये संदेश बन रहे हैं, स्वाद का, सेहत का और नारी शक्ति का।






