आखिर क्या है ‘वनटैग’?
अब तक FASTag से जुड़ा बैंक बदलने के लिये पुराने FASTag को बंद कर नया FASTag लेना पड़ता था। इसके लिये नया खाता और नया स्टिकर भी लेना पड़ता था। वनटैग इस पूरी कवायद को खत्म करने जा रहा है। अब वाहन मालिक अपना मौजूदा FASTag दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर सकेंगे, जबकि वाहन पर लगा स्टिकर वही रहेगा।
बैंक बदलना है तो Rajmargyatra ऐप काम आयेगा
यह सुविधा NHAI के Rajmargyatra ऐप के जरिये उपलब्ध होगी। बैंक बदलने की प्रक्रिया में पहले यूजर की पात्रता और पहचान की जांच होगी। इसके बाद वह अपनी पसंद का नया बैंक चुनकर पोर्टेबिलिटी की प्रक्रिया पूरी कर सकेगा। पोर्टेबिलिटी पूरी होने के बाद नया बैंक FASTag की सेवायें संभालेगा। वहीं पुराने बैंक की जिम्मेदारी पुराने वॉलेट में बचे पैसे के रिफंड और लंबित लेनदेन का निपटारा करने की होगी। वनटैग शुरू होने के बाद टोल प्लाजा पर वाहन चालकों के लिये कोई नई प्रक्रिया नहीं होगी। FASTag से टोल भुगतान पहले की तरह NETC नेटवर्क के जरिये ही होगा। यानी वाहन उसी तरह टोल प्लाजा से गुजरेगा और खाते से टोल की रकम अपने आप कटती रहेगी। NPCI नये बैंक की जानकारी NETC नेटवर्क में अपडेट करेगा।
13 करोड़ FASTag जारी, करीब 6 करोड़ एक्टिव
भारत में FASTag की पहुंच अब 98 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है। अब तक करीब 13 करोड़ NETC FASTag जारी किये गये हैं, जिनमें लगभग 6 करोड़ सक्रिय हैं। FASTag Radio Frequency Identification (RFID) तकनीक पर काम करता है। टोल प्लाजा पर लगे सिस्टम वाहन के FASTag को पहचानते हैं और जुड़े खाते से टोल की राशि स्वतः कट जाती है। गडकरी ने कहा कि FASTag आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन व्यवस्था पूरी तरह लागू होने से सरकार को हर साल 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक का फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि FASTag के इस्तेमाल से टोल बूथों की आय में करीब 10 फीसदी यानी 7,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। टोल से होने वाली आय अब 82,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है।
मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री होंगे सभी टोल बूथ
सरकार अब टोल प्लाजा पर बैरियर हटाकर यातायात को और तेज करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। गडकरी के मुताबिक इस साल दिसंबर के अंत तक 70 फीसदी से ज्यादा टोल बूथ बैरियर-फ्री हो जायेंगे और मार्च 2027 तक सभी राष्ट्रीय राजमार्ग टोल बूथों को बैरियर-फ्री करने का लक्ष्य है। जिन टोल बूथों पर अभी बैरियर-फ्री व्यवस्था का परीक्षण चल रहा है, वहां से भी 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय की उम्मीद जताई गई है। गडकरी ने तकनीकी क्षेत्र से ट्रकों में ओवरलोडिंग का पता लगाने के लिये नये तकनीकी समाधान विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के माल ढुलाई क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी है और सरकार इसे सुधारने की दिशा में काम करेगी। गडकरी ने कहा कि अध्ययनों के मुताबिक FASTag के कारण सिर्फ ईंधन खर्च में ही हर साल 5,250 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हुई है। टोल बूथों की परिचालन लागत भी घटकर करीब 2-3 फीसदी रह गई है, जो पहले लगभग 12 फीसदी थी।







