Ranchi : राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में चक्रवाती तूफान “मोंथा” का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। गुजरे चार दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवा ने किसानों की महीनों की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है। 28 अक्टूबर की शाम से शुरू हुई बारिश ने धान, सब्जी और आलू की फसलों को तबाह कर दिया। चान्हो, मांडर, इटकी, बेड़ो, कांके, अनगड़ा और सोनाहातू के खेतों में पककर झूम रहे धान के पौधे अब कीचड़ में लोटती हताश उम्मीदों की तरह बिखर गये हैं। तेज हवा में झुकी फसलें अब नमी से भर गई हैं, धान में फफूंदी का डर है और सब्जियों का हाल तो और भी बुरा है, बीन्स, गोभी, टमाटर, खीरा और नेनुआ जैसे पौधे या तो झुक गये हैं या फिर सड़ने लगे हैं। कुछ किसानों ने कहा कि धान बस कटाई के करीब थी, तभी यह आफत आ गई, अब न धान बचेगा, न सब्जी। पूरा साल का मेहनत एक ही झटके में खत्म हो गया।
कृषि पदाधिकारी राम शंकर प्रसाद सिंह ने मीडिया को बताया कि रोजाना करीब 100 किसान फसल नुकसान की शिकायत दर्ज करा रहे हैं। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, वे टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के भीतर
फोटो के साथ नुकसान की जानकारी दें। प्रशासन ने राहत और मुआवजा पर आपात बैठक भी की है।








