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मोदी सरकार ने किया नई ड्रोन पॉलिसी का ऐलान , जानें क्‍या है खासियत

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kohramlive desk : केंद्र की मोदी सरकार ने ड्रोन के यूज के लिए नयी नीतियों का एलान गुरुवार को कर दिया है। ध्‍यान देने लायक बात यह है कि जम्‍मू में इंडियन एयरफोर्स (IAF) के बेस पर हुए ड्रोन हमले के बाद अथॉरिटीज और सरकार स्‍पेशल एक्‍शन मोड में है। इसी के मद्देनजर ड्रोन रूल्‍स 2021 की घोषणा  हुई है। ड्रोन रूल्‍स 2021 UAS रूल्‍स 2021 की जगह लेगा। जरूरत और ससमय के हिसाब से इसका पूरा स्‍ट्रक्‍चर तैयार किया गया है।

नयी पॉलिसी के प्रमुख नियम ये हैं –

.  भारी पेलोड ले जाने वाले ड्रोन और ड्रोन टैक्सियों को शामिल करने के लिए ड्रोन नियम 2021 के तहत ड्रोन का कवरेज 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम किया गया। फॉर्म/अनुमति की संख्या 25 से घटाकर 5 कर दी गई है। किसी भी तरह के रजिस्‍ट्रेशन या फिर लाइसेंस के लिए सिक्‍योरिटी क्‍लीयरेंस की जरूरत नहीं होगी। अनुमतियों के लिए फीस नाममात्र के स्तर तक घटाई गई है। अधिकतम जुर्माना घटाकर 1 लाख रुपए कर दिया गया है।

. Digital Sky Platform पर हरे, पीले और लाल रंग के इंटरएक्टिव हवाई क्षेत्र प्रदर्शित होंगे। इन प्‍लेटफॉर्म को बिजनेस के अनुकूल सिंगल विंडो ऑनलाइन सिस्‍टम के तहत डेवलप किया जाएगा। येलो जोन को एयरपोर्ट के दायरे में 45 किलोमीटर से कम करके अब 12 किलोमीटर तक कर दिया गया है। एयरपोर्ट के दायरे में 8 से 12 किमी के बीच के क्षेत्र में ग्रीन जोन और 200 फीट तक के क्षेत्र में ड्रोन के संचालन के लिए किसी इजाजत की जरूरत नहीं है।

ग. सभी ड्रोन का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के जरिये होगा।

ड्रोन के ट्रांसफर और डीरजिस्ट्रेशन के लिए आसान प्रक्रिया निर्धारित की गई है। देश में मौजूदा ड्रोनों को नियमित करने का आसान अवसर दिया गया है। माइक्रो, नैनो और R&D संगठनों के ड्रोन को किसी भी तरह के पायलट लाइसेंस की आवश्‍यकता नहीं होगी। सेफ्टी फीचर्स जैसे ‘नो परमीशन-नो टेक ऑफ’, रियल टाइम ट्रैकिंग, जियों फेंसिंग को इसमें जगह दी गई है। यह नोटिफाइड फीचर्स हैं और इन नियमों के लिए 6 माह की समय सीमा तय की गई है।

.  हर तरह की ड्रोन ट्रेनिंग और टेस्टिंग को ऑथराइज्‍ड ड्रोन स्‍कूल की तरफ से ही पूरा किया जाएगा. डायरेक्‍टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की तरफ से ट्रेनिंग की जरूरतों के बारे में बताया जाएगा। GCA की ड्रोन स्‍कूलों की निगरानी करेगी और साथ ही पायलट लाइसेंस ऑनलाइन मुहैया कराएगी। अनुसंधान एवं विकास संस्थाओं के लिए टाइप सर्टिफिकेट, यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर, अनुमति और रिमोट पायलट लाइसेंस की कोई जरूरत नहीं होगी। ड्रोन का आयात DGFT की तरफ से रेगुलेट किया जाएगा। कार्गो डिलीवरी के लिए ड्रोन कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।

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