Kohramlive : धुंध में लिपटे त्रिकुटा पर्वत की तलहटी में बसा है वह नगर, जहां भक्ति सांसों में बहती है और श्रद्धा हर नुक्कड़-गली में गूंजती है। वैष्णो देवी (Mata Vaishno Devi) की यात्रा यहीं से शुरू होती है और इसी के साथ शुरू होता है भक्तों के मन में अटूट विश्वास का एक नया अध्याय। लेकिन, इस नगर की खासियत सिर्फ इसकी आध्यात्मिकता नहीं, बल्कि इसका सात्त्विक स्वाद भी है। कटरा, जहां लहसुन-प्याज को छूने तक की इजाजत नहीं। यहां हर कड़ाही से उठती खुशबू में सादगी की मिठास है, मसालों की महक में श्रद्धा की सुगंध। बाजारों में ताजे फल, सूखे मेवे और शुद्ध देसी घी की दुकानें मिल जायेंगी, लेकिन एक भी दुकान पर प्याज नहीं मिलेगा।
यह नियम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक आस्था है, जो वर्षों से चली आ रही है। कहते हैं, यहां का हर स्वाद भक्तिभाव में रचा-बसा है, जहां भोजन भी पूजन की तरह पवित्र होता है। कटरा की हर थाली सात्त्विकता की मिसाल है, जहां मसालों में तीखापन नहीं, बल्कि भक्ति की सरलता घुली होती है। तो जब अगली बार कटरा जाएं, तो वहां के पराठों और कढ़ी की सादगी में उस आध्यात्मिक मिठास को महसूस करें, जो केवल इस धरती की विशेषता है!”
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