Hazaribagh : कहते हैं सपनों के सुर जब हौसले की ताल से मिल जायें, तो कामयाबी की धुन खुद-ब-खुद बज उठती है। कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है हजारीबाग के पदमा कस्तूरबा विद्यालय की नन्ही बेटियों ने। ना कोई गुरु, ना कोई गाइड, सिर्फ टीवी देखकर इन बच्चियों ने खुद बैंड बजाना सीखा और आज जिला स्तरीय बैंड प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर पूरे जिले का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
“खेलो झारखंड” में बजा कस्तूरबा का डंका
हजारीबाग के संत कोलंबस कॉलेज मैदान में आयोजित इस जिला स्तरीय बैंड प्रतियोगिता में 10 स्कूलों की टीमें उतरीं,
पर जब कस्तूरबा विद्यालय की बेटियों ने मैदान संभाला, ढोल की थाप, तुरही की गूंज और ड्रम की लय पर पूरा मैदान तालियां बजाने लगा। नतीजा, कस्तूरबा विद्यालय हजारीबाग की टीम बनी “जिले की सर्वश्रेष्ठ बैंड टीम”। अब यह टीम रांची में होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अपने हुनर का परचम लहराने को तैयार है।
टीचर नहीं था, तो टीवी से सीखा…
बैंड बजाने वाली छात्राओं ने बताया कि हमारे स्कूल में बैंड सिखाने वाला कोई शिक्षक नहीं था। लेकिन हमने टीवी देखकर अभ्यास किया और धीरे-धीरे खुद सीखा कि किस ताल पर कौन-सा सुर सही बैठता है। अब इनका सपना है कि दिल्ली की गलियों में भी अपने सुरों से तिरंगा लहरायें। जिला अधिकारियों और शिक्षकों ने इन बच्चियों के हौसले को सलाम किया। उन्होंने कहा कि ये बेटियां इस बात की मिसाल हैं कि अगर जज्बा सच्चा हो, तो कमी भी सफलता की राह में कभी रुकावट नहीं बनती।






