kohram live desk : ‘ऐ मेरे प्यारे वतन‘ शायद ही कोई 15 अगस्त या 26 जनवरी का दिन गुज़रा होगा, जब ये गीत हमारे कानों में ना पड़ा हो. देशभक्ति की ऊर्जा से भर देने वाला गीत. जब भी बजता है होठअपने आप सुर से सुर मिलाने लगते हैं. वाकई में देश के लिए दिल कुर्बान करने की इच्छा जाग जाती है. लेकिन शायद ये बात आपको आश्चर्यचकित करे दे. ये देशभाक्ति वाला गीत असल में हिंदुस्तान के लिए नहीं बल्कि अफ़ग़ानिस्तान के लिए गाया गया था. पूरी कहानी क्या है. आइये जानते हैं.
ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐमेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल कुर्बान’
#अफ़ग़ानिस्तान की याद में…
1961 में गुरु दत्त की फ़िल्म आई थी ‘काबुलीवाला’. ये फ़िल्म रबीन्द्रनाथ टैगोर की लघु-कथा ‘काबुलीवाला’पर आधारित थी. कहानी एक फ़ल बेचने वाले की, जो हर साल कलकत्ता आता और गली-गली जाकर फ़ल बेचता. फ़ल बेचने के दौरान काबुलीवाले को एक पांच साल की लड़की मिलती है मिनी. अब वो रोज़ मिनी को फल देता और उसके साथ खेलता. काबुलीवाला मिनी को अपनी बेटी की तरह प्यार करने लगता है. किसी कारण पुलिस काबुलीवाले को पकड़ कर जेल में डाल देती है. कई सालों बाद रिहा होते ही वो सबसे पहले वो मिनी के घर जाता है. मिनी अब जवान हो चुकी होती है और ‘काबुलीवाला’बूढ़ा हो जाता है इसी कारण वो उसे पहचान नहीं पाती.
जब काबुलीवाला जेल में कैद होता है, तब वो अपने वतन काबुल यानी अफ़ग़ानिस्तान को याद करते हुए ये गीत गाता है. इस गाने का म्यूजिक दिया था सलिल चौधरी ने. और ‘ऐ मेरे प्यारे वतन’ बोल लिखे थे प्रेम धवन जी ने. इस गीत को मन्ना डे ने अपनी आवाज़ से नवाज़ा था.
यहां इस गीत के लेखक प्रेम धवन जी की जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है. इस गीत की उन्होंने इतने महीन और सटीक शब्दों के साथ बुनावट की है. कि चाहे इस गीत को हिंदुस्तानी सुने या कोई अफगानी. सभी के दिल में अपने-अपने देश के लिए भाव उमड़ पड़ते हैं. धवन साब लिखते हैं,
तेरे दामन से जो आए
उन हवाओं को सलामचूम लूं मैं उस ज़ुबां को
जिस पे आए तेरा नाम
सबसे प्यारी सुबह तेरी
सबसे रंगीन तेरी शामतुझ पे दिल कुर्बान
कहीं किसी भी मुल्क का नाम लिए बगैर पूरे गाने के कण-कण में वतन सरपरस्ती का जो बोध आता है, वो अदभुत है. वाकई….
‘ऐ मेरे प्यारे वतन,तुझ पर दिल कुर्बान’










