Kohramlive : इस्राइल-ईरान युद्ध आठवें दिन भी जारी रहा। हमले तेज हो चुके हैं, रणनीतियां और भी धारदार। लेकिन इस महायुद्ध के बीच एक और चुपचाप चलती लड़ाई है, “सैनिकों की सेहत की जंग”, जो हर युद्धभूमि से दूर किसी कैंप में लड़ी जाती है। इस्राइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) की पूरी दुनिया में एक छवि है, दुनिया की सबसे कठोर, अनुशासित और फिट सेनाओं में एक। यह फौलादी जज्बा सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि एक खास आहार-नीति से बनता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोषेर नियमों के मुताबिक IDF सैनिक चिकन, टर्की, बकरी, भेड़ और कुछ मछलियां खा सकते हैं। लेकिन पोर्क और शेलफिश वर्जित हैं। IDF में चिकन सबसे अधिक खाया जाता है, क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध है, स्वादिष्ट और हाई प्रोटीन भी है। IDF के कैंप में फलाफल, सबिच, इस्राइली सलाद, टोफू शॉवर्मा और मूसली जैसे शाकाहारी विकल्प भी मौजूद हैं, जो शाकाहारी और वीगन सैनिकों की जरूरतें पूरी करते हैं। सुबह का नाश्ता शाकशुका, ट्यूनीशियाई सैंडविच, एनर्जी बार एवं दोपहर का भोजन ग्रिल्ड चिकन, शॉवर्मा, बीफ बर्गर हैं, वहीं शाकाहारी थाली में टोफू श्नाइटल, चावल, दही, फल परोसे जाते हैं। IDF में युद्ध के मैदान से लेकर कैंप तक, शराब पीना पूरी तरह वर्जित है। अनुशासन ही पहली और आखिरी कसौटी है। 1.7 लाख एक्टिव और 4 लाख रिजर्व सैनिकों वाली इस्राइली सेना कई युद्धों से गुजर चुकी है, और हर बार और मजबूत होकर लौटी है। इसके पीछे सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि वो अदृश्य हथियार है, “शरीर और मन की तैयारी”, जो हर भोजन की थाली से शुरू होती है।











