New Delhi : भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मंगलवार को घोषित हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय उद्योग के लिये किसी संजीवनी से कम नहीं है। देश के शीर्ष उद्योग संगठन इसे खुलकर ‘गेम-चेंजर’ बता रहे हैं। CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इसे भारत की वैश्विक व्यापारिक यात्रा में रणनीतिक उपलब्धि करार दिया। उनका कहना है कि इस समझौते के तहत भारतीय निर्यात को 99 फीसदी से अधिक उत्पादों पर अभूतपूर्व प्राथमिकता मिलेगी। मतलब साफ है कि यूरोप के हाई-वैल्यू बाजार में अब ‘मेड इन इंडिया’ की गूंज और तेज होगी। चंद्रजीत बनर्जी ने मीडिया को बताया कि FTA से विदेशी निवेश बढ़ेगा, आधुनिक तकनीक का प्रवाह होगा एवं उत्पादन क्षमता में जर्बदस्त उछाल आयेगा। यह समझौता न सिर्फ बड़े उद्योगों बल्कि MSME और श्रम-प्रधान सेक्टर के लिये भी उम्मीदों की नई सुबह लेकर आया है।
इन सेक्टरों की खुलेगी किस्मत
FTA से जिन क्षेत्रों को सीधा फायदा मिलने वाला है, उनमें वस्त्र और परिधान, चमड़ा व फुटवियर, रत्न व आभूषण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य, आईटी और प्रोफेशनल सेवायें शामिल हैं। खास बात यह कि यह समझौता भारतीय प्रतिभाओं के लिये भविष्य-उन्मुख मोबिलिटी फ्रेमवर्क भी तैयार करेगा। फिक्की के अध्यक्ष आनंद गोयनका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुये इस करार को भारत के हालिया FTA समझौतों में सबसे व्यापक और दूरगामी बताया। उनका कहना है कि यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा और उच्च क्षमता वाला बाजार है, जहां यह समझौता व्यापार और निवेश के नए द्वार खोलेगा। फिक्की का साफ मानना है कि यह FTA विनिर्माण को मजबूती देगा, उच्च-मूल्य निर्यात को बढ़ावा देगा एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की गहरी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। वहीं, सबसे अहम बात यह कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम साबित होगा।








