Kohramlive : रविवार की सुबह, जब केदारनाथ की घाटियां भक्तों के जयकारों से गूंज रही थीं, उसी समय एक चीखती हुई खबर आसमान से टूटकर धरती पर आ गिरी। गौरीकुंड की निर्जन पहाड़ियों के ऊपर एक हेलीकॉप्टर जो केदारनाथ से गुप्तकाशी की ओर श्रद्धालुओं को लेकर निकला था, मौन हो गया। सुबह के करीब 5:30 बजे, आर्यन कंपनी का यह हेलीकॉप्टर मानो प्रकृति की किसी अनकही व्यथा में घिरकर गहरी खाई में समा गया।
सात जीवन, एक क्षण में भस्म हो गए…
इनमें एक 23 महीने का मासूम भी था, जो शायद पहली बार अपनी मां की गोद से धरती का इतना ऊंचाई से दर्शन कर रहा था। जयसवाल परिवार, राजकुमार, श्रद्धा और नन्हा काशी, महाराष्ट्र से बाबा केदार के दरबार तक की आस्था की यात्रा पर निकले थे। लेकिन किसे पता था, यह यात्रा आखिरी यात्रा हो जायेगी। स्थानीय लोग बताते हैं कि गौरी माई खर्क के ऊपर जंगलों में जब वो आग का धुआँ उठता देखा, तो घाटियों में खामोशी गूंजने लगी। सूचना मिलते ही NDRF और SDRF की टीमें मौके पर रवाना हुईं। लेकिन तब तक सब कुछ राख हो चुका था—जिंदगियाँ, सपने, यात्राएँ। मृतकों में बीकेटीसी के कर्मचारी विक्रम सिंह रावत, स्थानीय युवक विनोद नेगी और कप्तान राजीव भी शामिल हैं। शव इतने बुरी तरह से झुलस गये हैं कि पहचान मुश्किल हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा “बाबा केदार से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दें।” गौरतलब है कि यह हादसा ऐसे समय में हुआ जब कुछ दिन पहले ही एक अन्य हेलिकॉप्टर ने तकनीकी खराबी के चलते हाईवे पर इमरजेंसी लैंडिंग की थी।




