Kohramlive : जब अंग्रेजी हुकूमत ने भारत के विशाल भूभाग पर अपना अधिपत्य जमा लिया था, तब भी गोवा एक ऐसा प्रदेश था, जहां उनकी हुकूमत कभी नहीं चल पाई। कारण था—पुर्तगालियों का लोहे जैसा मजबूत शासन, जिसने चार शताब्दियों तक गोवा को अपनी मुट्ठी में रखा। 1498 में वास्को द गामा के कालिकट (अब कोझिकोड) पहुंचने के बाद, पुर्तगालियों ने धीरे-धीरे भारत में अपने व्यापार की जड़ें जमानी शुरू कीं। 1510 में अफ़ोन्सो द अल्बुकर्क ने गोवा पर आक्रमण किया और इसे जीत हासिल कर लिया। इसके बाद गोवा (Goa State) पुर्तगाल की स्थायी कॉलोनी बन गया।
अंग्रेजों के प्रयास और असफलता (Goa State)
17वीं और 18वीं शताब्दी में जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर अपना नियंत्रण बढ़ाया, तब उन्होंने गोवा पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन पुर्तगालियों की मजबूत सैन्य शक्ति और यूरोपीय संधियों के कारण अंग्रेज इसमें सफल नहीं हो सके। ब्रिटिश राज के दौरान भी गोवा पर हमेशा पुर्तगालियों का ही शासन बना रहा।
भारत की आजादी और गोवा पर पुर्तगाली कब्जा
1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब भी गोवा पुर्तगाल के नियंत्रण में ही रहा। भारत ने इसे शांतिपूर्ण तरीके से पाने की कोशिश की, लेकिन पुर्तगाल ने इनकार कर दिया। इसके बाद 1961 में भारतीय सेना ने “ऑपरेशन विजय” चलाया और 19 दिसंबर 1961 को गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त करा लिया।
गोवा की स्वतंत्रता, एक ऐतिहासिक उपलब्धि
इस तरह, गोवा को अंग्रेजों से नहीं, बल्कि पुर्तगालियों से आजाद कराना पड़ा। यह भारतीय इतिहास का एक अनूठा अध्याय है, जहां अंग्रेजों का साम्राज्य तो था, लेकिन गोवा उनकी पहुंच से दूर था।
अंग्रेज सबसे पहले 24 अगस्त 1608 को सूरत आए थे। 1615 में थॉमस रॉ ने जहांगीर के दरबार में व्यापार की अनुमति ली थी और इसके बाद धीरे-धीरे अंग्रेजों ने पूरे भारत पर कब्जा कर लिया। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि गोवा भारत का इकलौता ऐसा राज्य है जिसको अंग्रेज गुलाम नहीं बना सके। अंग्रेजों से पहले यहां पुर्तगाली 1498 में आए थे और पुर्तगालियों ने गोवा में बिजनेस किया।
अंग्रेजों और पुर्तगालियों के बीच का युद्ध हुआ और गोवा कभी भी अंग्रेजों के अधिकार में नहीं गया। पुर्तगाली 400 सालों तक भारत में रहे। अंग्रेजों के समय में भी गोवा पर पुर्तगालियों का अधिकार था यही वजह है कि कभी भी अंग्रेजों के अधिकार में नहीं गया।
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