Ranchi : रांची की शांत फिज़ाओं में इस वक़्त कुछ बेचैनी है… कांके-नगड़ी की मिट्टी पर कोई हल चलाने से पहले पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को उनके ही घर में कैद कर दिया गया।सुबह-सुबह पुलिस पहुंची, दरवाज़े पर दस्तक हुई, और DSP ने कह दिया “अब आप घर से बाहर नहीं जा सकते।” वजह? RIMS-2 की उस ज़मीन को लेकर विरोध, जो आदिवासियों की मानी जाती है।
चंपाई सोरेन, समर्थकों के बीच अपने आवास पर ही डटे हुये हैं। उनका कहना है कि “मुझे RIMS-2 से नहीं, जमीन के चुनाव से आपत्ति है। ये जमीन हमारे पुरखों की है, हमारी पहचान है। रांची में और भी कई ज़मीनें हैं, कम उपजाऊ, खाली पड़ी… फिर यही क्यों?” यह सिर्फ एक राजनीतिक मोर्चा नहीं, एक भावनात्मक आंदोलन है जहां मिट्टी की ख़ुशबू, विरासत की हिफाज़त, और पहचान का सवाल है। चंपाई की आवाज़ में वही सख़्ती है, जो वर्षों के संघर्ष में पकी होती है।
वो बताते हैं – “हमारे लोग शनिवार से ही रास्तों में रोके जा रहे हैं। मेरे बेटे बाबूलाल को भी हिरासत में ले लिया गया है। किसानों को नगड़ी पहुंचने नहीं दिया जा रहा। क्या लोकतंत्र में अब आंदोलन करना भी जुर्म है?”














