पालघर के चंद्रकांत तरे अपने 7 साथियों के साथ समुद्र में मछली पकड़ने गए थे। जब इन लोगों ने समुद्र में जाल डाला, तो ‘सी गोल्ड’ कही जाने वाली दुर्लभ घोल मछलियां इसमें फंस गईं। चंद्रकांत की किस्मत इतनी अच्छी थी कि उनके जाल में एक-दो नहीं पूरी 157 घोल मछलियां एक साथ फंस गईं। ये मछलियां 1.33 करोड़ रुपए में बिकीं। मछलियों का ऑक्शन पालघर के मुर्बे में हुआ। चंद्रकांत के बेटे सोमनाथ ने बताया कि उन्होंने हर मछली को करीब 85 हजार रुपये में बेचा।
मछुआरे: समुद्र तट से 20 से 25 नॉटिकल माइल अंदर मिलीं सी गोल्ड
सोमनाथ ने बताया कि वे 7 लोगों के साथ हारबा देवी नाम की नाव से समुद्र में 20 से 25 नॉटिकल माइल अंदर वाधवान की तरफ गए थे। इसी दौरान उनके पिता के समुद्र में फैलाए जाल में 157 घोल मछलियां फंस गई। इसके साथ ही नाव पर सवार लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई, क्योंकि यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी कमाई वाली ट्रिप बन गई थी।
दवाइयों और कॉस्मेटिक्स में होता है ‘सी गोल्ड’ का इस्तेमाल
घोल मछली का वैज्ञानिक नाम ‘Protonibea Diacanthus’ है। इसे ‘सी गोल्ड’ भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल दवाइयां और कॉस्मेटिक्स बनाने में होता है। थाईलैंड, इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर जैसे देशों में इसकी बहुत मांग है। सर्जरी के दौरान इस्तेमाल होने वाले धागे, जो अपने आप गल जाते हैं, वे भी इसी मछली से बनाए जाते हैं।
इसके बाद किनारे आने पर जब मछली की बोली लगाई गई तो उसके 1 करोड़ 33 लाख के करीब की बोली लगी. घोल मछली में काफी लाभकारी होती है, जिसका इस्तेमाल दवाई बनाने में भी किया जाता है. इस वजह से एक मछली की कीमत हजारों में होती है. इसलिए इसे सोने के दिल वाली मछली के नाम से भी जाना जाता है. चंद्रकांत के बेटे सोमनाथ सोमनाथ के मुताबिक घोल मछली के पेट मे एक थैली होती है जिसकी बहुत मांग है.
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा कि जब मछली की वजह से कोई आदमी करोड़पति बना हो. इससे पहले भी दुनियाभर में कई लोगों को बड़ी दुर्लभ मछलियां मिली है, जिन्हें बाजार में बेहद ऊंची कीमत पर बेचा जाता है. जबकि व्हेल की उल्टी के मिलने की वजह से भी कई मछुआरों करोड़पति बन हैं. हालांकि ऐसा बहुत कम ही होता है कि लोगों को व्हेल की उल्टी मिल जाए. लेकिन जब मिलती है तो लोगों के दिन बदलते देर नहीं लगती.










