Kohramlive : बात-बात पर टेंशन लेना घातक है। जिंदगी में छोटी-छोटी बातों पर गौर कर टेंशन मुक्त रहा जा सकता है। बिना चिंता में जकड़े कुछ बातों को नजरअंदाज कर बड़े आसान तरीके से खुशहाल जिंदगी जिया जा सकता है। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि बात-बात पर घोर टेंशन लेने का मतलब है डिप्रेशन को न्योता देना। BP या शुगर अलग से बढ़ जाते। हृदय रोगियों के लिये टेंशन अच्छा संकेत नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि कुछ बातों को नजरअंदाज कर तनाव को बड़े सहज तरीके से टाला जा सकता है। वहीं योगा और ध्यान से पॉजेटिव थॉट हासिल कर जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है। जिंदगी खुदा की रहमत है तो जीना इस कदर दुश्वार क्यों है? ऐसे अल्फाज में दम जरूर है, पर किसी विद्वान ने कहा है कि जिंदगी जीना आसान नहीं, उसे आसान बनाना पड़ता है। धैर्य, संयम, बर्दाश्त और कुछ बातें नजरअंदाज कर जिंदगी जीने को आसान बनाया जा सकता है।
टेंशन यानी तनाव को काबू में रखने के लिये रांची के एक जाने-माने डॉ उमा शंकर वर्मा ने कुछ टिप्स दिये हैं, मसलन, पॉजिटिव एटिट्यूड तनाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं। बेवजह चिंता में ही डूबे रहना सेहत के लिये घातक है। जो आपके वश में नहीं, उसपर ज्यादा सोचना या दिमाग लगाना घातक साबित हो सकता है। तनावपूर्ण माहौल में उग्र होने से बेहतर है गुस्से को कंट्रोल में रखें। धैर्यवान रहे। अपनी भावनाओं को काबू में रखना सीखें। टाइम का बेखूबी सही तरीके से इस्तेमाल कर अपना एक रूटिन फॉलो करें, वहीं देर रात तक जागे नहीं। डिजीटल होती इस दुनिया में गूगल बाबा या सोशल मीडिया से देर रात तक जुड़े रहना सबसे घातक है, जरूरत भर ही इसकी खुराक लें। इससे दूरी जरूरी है। जिन बातों से आपको सबसे ज्यादा स्ट्रेस होता है, उसकी पहचान करना जरूरी। मतलब जो दुख दें, उससे दूर हो जाये। तनाव कम करने की खातिर नशे के सेवन से बचें। इसके बावजूद अगर टेंशन बरकरार है तो किसी मनोवैज्ञानिक से मिलना लाभदायक हो सकता है।
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