KohramLive : गजल के रास्ते फैंस के दिलों में धड़कने वाले पद्मश्री गायक पंकज उधास ने आखिरी हिचकी ले ली। लगभग 72 साल के गजल गायक पंकज उधास ने साल 1979 में फिल्म ‘हम तुम और वो’ के लिए प्लेबैक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। उनके बड़े भाई मनहर उधास पहले से ही बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगर थे, जिससे चलते पंकज उधास को संगीत की दुनिया में कदम रखने में सहुलियत मिल गई। चांदी जैसा रंग है तेरा..चिट्ठी आई है..निकलो ना बेनकाब ज़माना ख़राब है..एक तरफ उसका घर..दीवानों से मिलकर रोना अच्छा लगता है..जैसी गजलों के लिये जाने जाने वाले दिलअजीज गजल गायक पंकज उधास के 59 से ज्यादा सोलो एल्बम पूरी दुनिया में छाये हुये हैं। पंकज उधास को साल 2003 में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया। उन्होंने अपनी लाइफ में कई पुरस्कार और मेडल झटके। मशहूर गजल गायक पंकज उधास अब लोगों की यादों में रह गये। लंबी बीमारी के बाद बीते कल उनका निधन हो गया।
गुजरात के जेतपुर में 17 मई 1951 को जन्मे पंकज उधास को बचपन से ही संगीत का शौक था। उन्होंने शुरू में शास्त्रीय संगीत सीखा। उनके पहले संगीत गुरू उनके बड़े भाई कांतिलाल उधास रहे। वहीं बाद में उस्ताद मुस्तफा खान को अपना गुरू बनाया। अहमदाबाद के सेंट जेवियर्स स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें संगीत का शौक खींच कर मुंबई ले गया। भारत-चीन युद्ध चल रहा था। इसी दौरान लता मंगेशकर का ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना रिलीज हुआ। पंकज ने एक स्टेज पर ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गया। उनके गीत से लोगों की आंखें नम हो गईं। दर्शकों में से एक शख्स ने इनाम के तौर पर उन्हें 51 रुपए दिए। यह गाने के बदले उनकी पहली कमाई थी। मुंबई में उन्हें बड़े भाई मनहर उधास से खूब सपोर्ट मिला। Pankaj Udhas ने कई फिल्मों में गाने गाये। उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोंसले, जगजीत सिंह और अनूप जलोटा जैसे दिग्गज गायकों के साथ काम किया। उनके कई गजल फिल्मों और टेलीविजन शो में दिखाये गये। गजल की गहरी समझ रखने वाले पंकज उधास की सुरीली आवाज को लेकर पूरी दुनिया में छा गये। गजल सम्राट के नाम से जाने जाने लगे। पंकज उधास अपने विनम्र और व्यावहारिक व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। गजल प्रेमियों के दिलों के धड़कन बन गये। साल 1985 का बेस्ट गजल सिंगर होने के लिए के एल सहगल पुरस्कार मिला। साल 2006 में पंकज उधास को गजल गायक की कला में उनके योगदान के लिये पद्मश्री से सम्मानित किया गया, उनके गजल गायन के 25 साल पूरे होने के मौके पर कैंसर रोगियों और थैलेसीमिक बच्चों के लिए उनके महान योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। साल 2006 में ‘हसरत’ के लिए ‘2005 का बेस्ट गजल एल्बम’ के रूप में कोलकाता में प्रतिष्ठित ‘कलाकार’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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