- CoWIN के अलावा भी मिल सकती है वैक्सीनेशन के अपॉइन्ट्मेंट की जानकारी
- गूगल सर्च, मैप्स और असिस्टेंट पर उपलब्ध होगी टीकाकरण से जुड़ी सारी जानकारी
- इस हफ्ते से शुरू होगी गूगल की यह सेवा
कोरोना महामारी लाख सावधानियों के बाद भी लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है लेकिन इससे खुद को सुरक्षित रखने का जो सबसे अहम तरीका है वह है वैक्सीनेशन। वैक्सीनेशन की व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सरकार ने कोविन एप बनाया जिस पर वैक्सीनेशन की उपलब्धता की सारी जानकारी पाई जा सकती है। अब यह जानकारी कोविन एप को डाउनलोड किए बिना गूगल के ज़रिए आसानी से एकत्रित की जा सकती है। आइए जानते हैं कैसे…
Google : वैक्सीनेशन से जुड़ी सारी जानकारी
गूगल ने देश के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से हाथ मिला लिया था और तब से गूगल पर यूजर्स को कोविड के टीकाकरण केंद्रों से जुड़ी सारी जानकारी मिल रही है। गूगल के बयान की मानें तो यह जानकारी कोविन एपीआई के रियल-टाइम डाटा द्वारा एकट्ठा की जाएगी. इसमें यूजर्स को टीकाकरण से जुड़े सभी मुद्दों के बारे में जानकारी मिल जाएगी; हर टीकाकरण केंद्र पर कितने अपॉइन्ट्मेंट स्लॉट उपलब्ध हैं, कौनसी वैक्सीन मिलेगी, किस डोज के लिए आप वहां जा सकते हैं, टीके की कीमत क्या होगी और साथ ही कोविन वेबसाइट का लिंक जिस पर आप स्लॉट बुक कर सकते हैं। गूगल का कहना है कि वह कोविन की टीम से लगातार जुड़ा रहेगा और सही जानकारी यूजर्स तक पहुंचाता रहेगा।
आपको क्या करना होगा
गूगल के बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि देश के विभिन्न यूजर गूगल सर्च, गूगल मैप्स और गूगल असिस्टेंट पर यह जानकारी किस तरह पा सकते हैं। यूजर्स जैसे ही गूगल पर ‘वैक्सिनेशन सेंटर्स नीयर मी’ या अपने आस-पास के इलाके के नाम को डालकर सर्च करेंगे, टीकाकरण से जुड़ी सारी जानकारी उनके फोन या लैपटॉप की स्क्रीन पर प्रकट हो जाएगी। साथ ही, गूगल ने अपनी इस पहल को और यूजर-फ्रेंडली बनाने की कोशिश की है। यूजर यह सारी जानकारी अंग्रेजी के साथ-साथ आठ अन्य भारतीय भाषाओं में पा सकते हैं, नामतः, हिन्दी, बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलेगु, मलयालम, कन्नड़ और मराठी।
आपको बता दें कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अब तक 65.41 करोड़ डोज लग चुकी हैं । तुरंत अपने नजदीकी टीकाकरण केंद्र की सारी जानकारी एकत्रित करें, स्लॉट बुक करें और टीकाकरण करवाएं। इसी तरह हम कोविड को हराकर अपने सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।






