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बिना नोयडा और कोलकाता गये धरा था बंगाली और शर्मा को, IPS अमिताभ चौधरी ने DIG से ले ली थी अदावत

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Ranchi (Neeraj Thakur) : तेज तर्रार IPS अमिताभ चौधरी की एक खासियत थी। वह बोला भी करते थे, ठान लो तो जीत, मान लो हार। जब रांची में पुलिस कप्तान के तौर पर उनकी पोस्टिंग हुई तब उन्होंने कोई लंबी चौड़ी बातें नहीं कही। धीर-गंभीर दिखने और रहने वाले 1985 बैच के IPS अमिताभ चौधरी का काम करने का तौर, तरीका और अंदाज बिल्कुल अलग था। तब रांची में आतंक की गाथा लिखने वाले सुरेन्द्र बंगाली और अनिल शर्मा की फाइल उल्टी। उस वक्त रांची में आईजी हुआ करते थे ज्योति कुमार सिन्हा। नेक और मजबूत इरादा रखने वाले ज्योति कुमार सिन्हा ने अमिताभ चौधरी का इकबाल बुलंद किया। उन्हें टास्क दिया इन दोनों को सलाखों के पीछे डालने का। तब आईजी सिन्हा का भी अपना नेटवर्क गजब का था। तब रांची में प्रशिक्षु एएसपी रहे अब्दुल गनी मीर और तेज तर्रार पुलिस इंस्पेक्ट विक्टर एंथॉनी के संग रणनीति बनाई। रिजल्ट सामने आया। आईपीएस अमिताभ चौधरी को बंगाली को पकड़ने के लिए ना तो कोलकाता जाना पड़ा और ना अनिल शर्मा को धरने नोयडा। तब के दोनों आतंक के पर्याय रहे बंगाली और शर्मा बड़े आराम से पुलिस द्वारा बिछाये गये जाल में फंस गये। मॉनिटरिंग खुद आईजी सिन्हा कर रहे थे। इन दोनों के पकड़े जाने के बाद रांची के आवाम को यह भरोसा मिला कि यदि क्षुद्र स्वार्थों और पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर कोई अधिकारी सही लोगों को साथ लेकर सही दिशा में प्रयास करे तो कामयाबी उसके कदम खुद-ब-खुद चूमने लगती है। अमिताभ चौधरी अगर किसी की मदद करना चाहते थे, तो वे आउट ऑफ वे जाने में भी नहीं हिचकते थे। एक पढ़ा लिखा युवक मद्रास कॉफी हाउस गली में अवैध हथियार के साथ पकड़ा गया था। परिवार के लोग उनसे मिले और सही तस्वीर रख दी। कोई अंजान युवक उसके हाथ में हथियार थमा भाग गया था। उस वक्त सिहापी से इंस्पेक्टर बने दिनेश रजक के पास कोतवाली की कमान थी। सेम डेट सुपरवीजन कराकर निर्दोश छात्र को मुक्त कर दिया गया। सुपरवीजन डीएसपी मनोज कुमार सिंह ने किया था। कलेजा भी गजब का रखते थे।

इससे पहले रांची में दर्जन भर से अधिक सीनियर एसपी और सिटी एसपी सुरेंद्र बंगाली को दबोचने की आकांक्षा और गर्जना के साथ आए, लेकिन सबके सब मन मसोस कर चले गये। बंगाली एक मिथक बन चुका था। लेकिन दक्ष और चतुर एसएसपी चौधरी के निर्देश पर साहसी एएसपी अब्दुल गनी मीर और अपराधियों के इल्म के जानकार इंस्पेक्टर विक्टर एंथॉनी, हवलदार सुदर्शन सिंह और एक बहादुर जांबाज युवक ने स्पेशल अभियान में बंगाली को गिरफ्तार कर अपराध जगत का एक मिथक तोड़ दिया।

कोलकाता स्थित आवास में बंगाली को जिस सहजता और आसान तरीके से गिरफ्तार किया गया, यह अधिकारियों के दिमाग और बहादुरी की बलिहारी थी। बंगाली 24 जून 1997 को पकड़ा गया था। आईजी सिन्हा तब एक शब्द बोल गये थे… नीयत नेक और इरादा पक्का हो तो कुछ भी किया जा सकता है। एक से बढ़कर एक आतंक की गाथा लिखने वाले 4 अप्रैल 1996 को रांची के सीनियर एसपी के आवास के बाहर मारुती कार में सवार धनंजय नारायण सिंह को स्टेन गन से छलनी कर दिया था। कार्रबाइन और रिवाल्वर का भी इस्तेमाल हुआ था। तब राजीव कुमार एसएसपी हुआ करते थे। बंगाली ने इस कांड में यामहा बाइक का इस्तेमाल किया था। इस संबंध में रांची के लालपुर थाना में 4 अप्रैल 1996 को FIR (कांड संख्या 31/96) दर्ज किया गया था। उस समय के इंस्पेक्टर रहे अभय झा, इंद्रासन चौधरी, महेश सिंह, अनिल द्वीवेदी, विक्टर एंथॉनी जैसे अफसरों पर IPS चौधरी को नाज था।

1997 में रांची में एसएसपी की जिम्मेदारी संभाल जिस योजनाबद्ध तरीके से अमिताभ चौधरी ने काम करना शुरू किया, पुलिस तंत्र की विभिन्न कड़ियों को जिस प्रकार जोड़ा और विभाग के प्रतिभाओं को पहचाना, उससे तब यह संकेत मिल गया था कि चौधरी कुछ ना कुछ अलग जरूर करेंगे। जिससे वह हर दिल अजीज बन जाएंगे। उन्होंने ऐसा ही किया।

इसी तरह अनिल शर्मा भी बिछाये गये जाल में बहुत ही आसान तरीके से आ गया। उस समय अमिताभ चौधरी कुछ कमांडो को लेकर खुद रांची एयरपोर्ट पहुंचे थे। एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को नोयडा भेजा गया था। कई छोटे-बड़े गिरोह की कमर की रीढ़ तोड़ दी गई। कुछ का इनकाउंटर हो गया। कुख्यात बैंक डकैत जीवन कच्छप का भी उसी समय अंत हुआ। लोअर बाजार के आतंक एकराम का भी खात्मा हुआ। अमिताभ चौधरी तब बेहद सुर्खियों में आ गये जब उन्होंने एक डीआईजी के मनाही के बावजूद डोरंडा के एक बिल्डर और बरियातू के एक कोयला माफिया के घर धावा बोल दिया। तब डीआईजी और एसएसपी की आपसी अदावत कोर्ट तक चली गई थी।

पुलिस सेवा में कई कामयाबी बटोरने के बाद उन्हें राजनीति करना भाया। नौकरी से वीआरएस ले ली। पर चुनाव जीत ना सके। इसके बाद खेल जगत में क्रिकेट से जुड़ गये। JSCA से BCCI तक उनके नाम की धमक चली। रांची में स्टेडियम बना इतिहास रच डाला। IPS अमिताभ चौधरी के कई किस्से हैं। उन्हें करीब से जानने और चाहने वालों के पास अब केवल उनकी बातें और यादें रह गई।

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