रांची : PLFI के जोनल कमांडर जिदन गुड़िया को मार गिरा कर झारखंड पुलिस ने साफ-साफ मैसेज कर दिया कि जो कोई चूहा-बिल्ली हो, वापस बिल में घुसे रहो, वरना पोस्टमार्टम हाउस जाने के लिए तैयार रहो। कुछ माह के अंदर छह हार्डकोर PLFI उग्रवादियों को ढेर कर झारखंड पुलिस का इकबाल बुलंद है। अगर यही धार पुलिस की बहती रही, तो कोई ‘चूहा’ या अन्य हार्डकोर अमन, चैन और सुकून को खुरेच लगाने की जुर्रत नहीं कर सकेगा। जिदन गुड़िया के बाद बारी है सुप्रीमो दिनेश गोप और उसके सबसे करीबी बन गए एक ‘चूहा’। बिल से निकला एक चूहा कैसे कुतर रहा राजधानी का चैन-सुकून। हद तो यह है कि धनबाद तक दस्तक दे दी। दुस्साहस ऐसा कि जब भी मुंह खोलता है, तो मांगता है कि एक से दो करोड़। कभी परचा फेंककर तो कभी साटकर और नहीं तो वहाट्सअप या सीधे वीडियो कॉलिंग कर। हर किसी को एक ही धमकी, होगी फौजी कार्रवाई या सजा-ए-मौत। खौफजदा हैं बिल्डर, कारोबारी, डॉक्टर और नेता। यह दिगर बात है कि कुछ मामलों में रांची पुलिस ने यह बेनकाब किया कि परचा तो फेंका जाता है पीएलएफआई के नाम का, पर निकलता है चिंदी चोर। जैसे डॉ शंभू को परचा मिला था PLFI के नाम का और धरा कर जेल गया बड़गाई का दो चिंदी चोर।
कालिया नाग की तरह मारता है फुफकार
नाम तो है चूहा, पर फुफकार रहा है किसी कालिया नाग की तरह। ऐसा नहीं है कि जहरीले फन को कुचलने का हुनर नहीं है झारखंड पुलिस के पास। है तभी तो 15 लाख के इनामी जिदन गुड़िया को महज 19 मिनट के ऑपरेशन में ढेर कर दिया। यह भी जता दिया कि इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी संभव है। डीजीपी एमवी राव दो दिन पहले 32 थानों के थानेदारों से सीधे संपर्क साध यह पूछा था कि उन्हें क्या हो रही है दिक्कत? क्या कोई राजनेता या नौकरशाह का दबाव है उनपर। अगर ऐसा है तो उन्हें नंगा करें। कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए अगर किसी वरीय अधिकारियों की ‘ग्लूकॉन-डी’ चाहिए, तो वो भी बताएं। उन्हें हर साधन-संसाधन मिलेगा। राज्य की जनता को सिर्फ आप शांति-सुकून से जीने की आजादी दें। जिदन गुड़िया को निबटाने देने के सबसे बड़े हीरो डीजीपी एमवी राव और रांची प्रक्षेत्र के डीआईजी अखिलेश झा हैं। उनका पूरा साथ दिया सीआरपीएफ के जांबाज जवानों ने।
सात जिलों के एसपी को उपलब्ध करा दी गई है पूरी ताकत
झारखंड पुलिस का अगला टारगेट और चुनौती बन गया चूहा फुदकते-फुदकते राजधानी तक पहुंच गया है। इसका पूरा बायोडाटा झारखंड पुलिस ने जुटा लिया है। सरकार ने इस पर पूरे दो लाख रुपये इनाम रखे हैं। इस ‘चूहा’ को खोज निकालने के लिए अलग से एसआईटी का गठन हो चुका है। कमान सौंपी गई है रांची के रूरल एसपी मो. नौशाद आलम को। उधर, धनबाद के एसएसपी असीम विक्रांत मिंज और सात जिलों के एसपी को भी पूरी ताकत उपलब्ध करा दी गई है। उम्मीद है बहुत जल्द इस चूहा को दबोच लिया जाएगा।
दो एके-47 के साये से घिरे इस चूहे का पूरा नाम है अवधेश कुमार जायसवाल उर्फ अबोध कुमार जायसवाल उर्फ बिहारी उर्फ चूहा। यह बिहार के नालंदा जिले के चिकसौरा बाजार का रहने वाला है। इसकी फितरत केवल लोगों को डराना-हड़काना और उनसे बतौर लेवी मोटी रकम वसूलना है। ऐसे कई चूहे ने दो दशक पहले भी राजधानी में दस्तक देने की हिमाकत दिखाई थी। तब पुलिस ने उनकी कमर तोड़कर रख दी थी। डर से कुछ बड़े हार्डकोर उग्रवादी हथियार डालकर नतमस्तक हो गए और जो फन उठाए रखे, उन्हें कुचल दिया गया। संगठन में हाल के दिनों में कुछ ऐसे चेहरों को जोड़ा गया है, जो समाज में भोले-भाले माने जाते हैं या फिर हैं सफेदपोश। इनका काम सिर्फ ऐसे लोगों का नाम और फोन नंबर जुटाना है, जिनके पास माल है। नाम, नंबर और पारिवारिक हैसियत जुटाकर यह सूचना सीधे पहुंचती है चूहा तक और चूहा के जरिए सुप्रीमो दिनेश गोप तक। सुप्रीमो से इशारा मिलते ही शुरू हो जाता है डराने-धमकाने और मांगने का सिलसिला।
कुछ जमीन माफिया, कारोबारी और सरकारी मुलाजिम ऐसे हैं, जो डिमांड पूरी कर अपनी शेष जिंदगी सुकून से जीना बेहतर समझते हैं। ज्यादातर मामला थाना तक नहीं पहुंच पाता। तीन दिन पहले राजधानी में बड़े कारोबारी से परचा फेंक मांगे गए एक करोड़ रुपये। डर-भय ऐसा कि यह कारोबारी ने एफआईआर तक नहीं कराया और न ही कुछ भी बोलने की हिम्मत जुटा पाया। वह इस जुगाड़ में लग गया है कि कैसे इस लफड़ा से बच निकले।
45 दिनों में 8 को मिला पर्चा
- रांची के बिल्डर अभय सिंह (अब मृत) से मांगी गई 2 करोड़ की रंगदारी, डराने के लिए दफ्तर में फेंका गया था बम
- तुपुदाना में रहने वाले अनीश शर्मा से एक करोड़ रुपये की मांगी गई रंगदारी
- तुपुदाना में ही राइस मिल संचालक प्रवीण कुमार से भी एक करोड़
- अपर बाजार के कारोबारी से 50 लाख मांगे गए
- धुर्वा के टेंट व्यवसायी संदीप कुमार से 50 लाख, डराने के लिए घर में दागी गोली
- अपर बाजार के दवा व्यवसायी विजय सिंघानिया से भी 50 लाख की रंगदारी मांगी गई
- डॉक्टर शंभू प्रसाद से 20 लाख
- कांके के एक जमीन कारोबारी से 30 लाख रुपये मांगी गई रंगदारी









