कोहराम लाइव डेस्क: आज कार्तिक शुक्ल की षष्ठी है। व्रत करने वाली महिलाएं छठ घाट पर पहुंचकर अस्ताचलगामी (छिपते हुए) सूर्य को अर्घ्य देंगी और पूजन करेंगी । वेदी के सामने छठ मैया की विधि-विधान से पूजन की जाएगी। इस बार कोरोना महामारी के चलते काफी श्रद्धालुओं ने घर या घर के आसपास भी अर्घ्य देने की तैयारी की है। शाम होते शहर के तालाब, नदी, झील व अन्य जगहों पर बनाए गए घाट छठ व्रतियों से रौनक में बदल जाएगी। व्रती पानी में उतर कर हाथ जोड़कर खड़ा रहेंगी। इसके बाद व्रती सूप के साथ पानी में पांच बार परिक्रमा कर अर्घ्य देंगी।सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पहला अर्घ्य समाप्त होगा।आज सूर्यास्त का समय शाम 05.01 पर होगा।
उदीयमान सूर्य को कल देंगे अर्घ्य
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी, षष्टमी व सप्तमी को छठ व्रत पर्व के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन नहाने के बाद गीले वस्त्रों से संतान को पोंछा जाता है, ताकि भगवान सूर्य बच्चों को दीर्घायु करें। व्रती महिलाओं ने गुरुवार को खरना किया। दिनभर उपवास के बाद स्नान कर छठी मैया को गुड़ की खीर और गेहूं की रोटी का भोग लगाकर अर्घ्य देने का संकल्प लेने के साथ पूजन-अर्चन किया। अर्घ्य देने से पूर्व घरों में व्रत रखने वाली महिलाओं ने खरना कर 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत की। शनिवार की सुबह यानी कार्तिक शुक्ल सप्तमी के दिन व्रती तड़के घाट पर इकट्ठा होकर सामूिहक रुप से उदीयमान भगवान भुवन भाष्कर को सुबह सूर्योदय 6.01 बजे के बाद अर्घ्य देंगी। बाद में व्रती पारण करेंगी। इसके साथ ही आस्था के इस चार दिवसीय महापर्व का समापन हो जाएगा।








