UP : एक मासूम की जिंदगी, खेल के नाम पर बर्बाद हो गई। पिता की मेहनत, परिवार का भविष्य और मां का इलाज सब एक क्लिक में उजड़ गया। यह घटना याद दिलाती है कि डिजिटल दुनिया की चमक के पीछे छुपा है खतरा, और इसे नजरअंदाज करने का मतलब है परिवार की बर्बादी। लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में एक ऐसा दुखद मामला सामने आया है जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। किसान सुरेश यादव का इकलौता बेटा यश ऑनलाइन गेम “फ्री फायर” के जाल में फंसकर अपनी जान ले बैठा। यश ने गेम में लगभग 14 लाख रुपये गंवा दिये, जो उसके पिता ने अपनी कई बीघा जमीन बेचकर परिवार की जरूरतों और पत्नी के इलाज के लिये जमा किये थे। लगभग 10 महीने तक बैंक खाते से लगातार ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होते रहे, लेकिन किसी को शक नहीं हुआ। यश को डर तब लगा जब उसे पता चला कि उसके पिता को सबकुछ पता हो गया है। इसके बाद उसने घर लौटकर फांसी लगा ली। घटना से पहले यश ने स्कूल में अपने दोस्तों से कहा था कि शायद वह अब स्कूल न आ सके, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पोस्टमार्टम के बाद यश का शव गांव लाया गया, मातम पसरा, मां बार-बार बेहोश हुईं और पिता गहरे सदमे में। यह हालत देख वहां मौजूद लोगों के आंखों से आंसू छलक आये। गांव के लोग भी इस घटना से गहरा आहत हैं और ऑनलाइन गेमिंग की खतरनाक आदत पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
बैंक और साइबर चेतावनी
बैंक की लापरवाही भी सामने आई, लाखों रुपये के ट्रांजेक्शन के बावजूद कोई अलर्ट या निगरानी नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल ऐप से होने वाले ट्रांजेक्शन की जानकारी केवल तब मिलती है जब ग्राहक खुद शिकायत करता है। यह घटना ऑनलाइन गेमिंग की लत और साइबर धोखाधड़ी के खतरों को उजागर करती है।
चेतावनी और सीख
- माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर सतर्क नजर रखनी चाहिये।
- बैंक और वित्तीय संस्थाओं को सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी बढ़ानी होगी।
- ऑनलाइन गेम्स में अति लिप्त होने से मानसिक स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।














