Ranchi : झारखंड मंत्रालय का सभाकक्ष आज आदिवासी चेतना का केंद्र बन गया, जब CM हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद् (TAC) की अहम बैठक हुई। बैठक में जनजातीय अस्तित्व, अधिकार और सम्मान को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिये गये, जो आने वाले समय में झारखंड की आत्मा कहे जाने वाले आदिवासियों की दिशा और दशा बदल सकते हैं। मतलब साफ है कि अबुआ दिशोम, अबुआ हक, अबुआ सरकार की नई गूंज झारखंड में झलकेगी। अब झारखंड में जनजातीय बाहुल्य पंचायतों में केवल विशेष परिस्थितियों में ही शराब की दुकानों को अनुमति मिलेगी, वो भी तब, जब वह स्थल पर्यटन महत्त्व से चिह्नित हो (धार्मिक स्थलों को छोड़कर)।
यह फैसला पर्यटन को बढ़ावा और अवैध शराब पर रोक के उद्देश्य से लिया गया, लेकिन जनजातीय संस्कृति की रक्षा की शर्त के साथ। CM हेमंत सोरेन ने यह स्पष्ट कर दिया कि झारखंड अब केवल आंकड़ों से नहीं चलेगा, यह अब अपनी सभ्यता, संस्कृति और संवेदना से चलेगा।
पहले जमीनी हकीकत, फिर विकास
पश्चिमी सिंहभूम के ईचा-खरकई डैम प्रोजेक्ट पर विस्थापन की आशंका को लेकर चिंता जताई गई। TAC ने तय किया कि पहले प्रभावित गांवों का फोटो-वीडियो आधारित भौतिक सत्यापन हो, फिर पीपीटी के रूप में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाये। इसके आधार पर ही आगे निर्णय होगा। अब हर दो माह में वनपट्टा का वितरण सुनिश्चित किया जायेगा। समीक्षा की जाएगी कि कितने आवेदन लंबित हैं, वहीं, वनपट्टा पाने वाले परिवारों को प्रमाण पत्र दिलाने में कोई अड़चन न आये इसके लिये उपाय तय किये गये।
काश्तकारी अधिनियम को मिलेगी मजबूती
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 46 में ‘थाना क्षेत्र’ को लेकर भ्रम दूर किया जायेगा। इसके लिए एक आयोग का गठन होगा जो 6 माह में रिपोर्ट देगा, ताकि जमीन कानूनों के क्रियान्वयन में स्पष्टता आ सके। बोकारो के ललपनिया स्थित लगुबुरु धार्मिक स्थल पर DVC की पनबिजली परियोजना पूरी तरह रोकी गई है। राज्य सरकार ने केंद्र व DVC को इस स्थान की धार्मिक महत्ता से अवगत कराया है। आस्था के स्थानों से विकास नहीं टकरायेगा, ये संदेश साफ है। बैठक में मंत्री सह उपाध्यक्ष चमरा लिंडा, प्रो. स्टीफन मरांडी, लुईस मरांडी, सोनाराम सिंकू, दशरथ गागराई, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोनगाड़ी समेत जनजातीय नेतृत्व की मजबूत उपस्थिति रही।





