Garhwa(Nityanand Dubey) : गढ़वा के सदर अनुमंडल कार्यालय के सुकूनभरे माहौल में जब ‘कॉफी विद एसडीएम’ कार्यक्रम शुरू हुआ, तो एक कप कॉफी ने प्रशासन और जमीनी कर्मियों के बीच संवाद का ऐसा पुल बनाया, जिसकी गूंज सीधे जनहित से जुड़ी थी। SDO संजय कुमार ने दस्तावेज नवीस संघ के प्रतिनिधियों से बेझिझक, आत्मीय बातचीत की और उसके बाद खुलने लगी वे परतें, जो बरसों से राजस्व-निबंधन कार्यों के बीच बाधा बनी हुई थीं। नवीस संघ ने सबसे पहले उस दर्द को सामने रखा, जिससे रोज हजारों लोग गुजरते हैं, स्थायी निबंधन पदाधिकारी और लिपिक का अभाव और कार्यालय में फैली अव्यवस्था। उनकी मांग थी कि पुराना निबंधन कार्यालय अब अनुमंडल परिसर के नये भवन में स्थानांतरित हो, ताकि काम व्यवस्थित और तेज से चल सके।
प्रतिनिधियों ने बताया कि अंचल स्तर पर कई ऑनलाइन प्रविष्टियों में त्रुटियां लंबे समय से लंबित हैं, खसरा की सच्ची प्रतिलिपि कई मामलों में उपलब्ध नहीं होती और ऐसे में आम नागरिकों के निबंधन कार्य बाधित हो जाते हैं। यह समस्या सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदों से सीधा टकराव है। नवीसों ने एक अहम मुद्दा उठाया, वन विभाग से अभिसूचित और मुक्त भूमि की सीमांकन सूची उपलब्ध नहीं कराई जा रही, जिससे पंजीयन कराने वाले नागरिकों को अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह बाधा पूरे जिले के राजस्व कार्यों पर गहरा असर डालती है।
संघ ने बताया कि पोर्टल पर तकनीकी त्रुटियां आम हैं, अंचल कार्यालय अक्सर दस्तावेजों को बिना ठोस आधार के त्रुटिपूर्ण बता देता है और Online Demand की लगान रसीद, नामांतरण वाद, पंजी-II और शुद्धि पत्र की प्रमाणित प्रतिलिपियां समय पर नहीं मिल पातीं। जिससे आवेदक और नवीस दोनों परेशानी झेलते हैं। बिना किसी लाग-लपेट के SDO ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना और कहा “स्वच्छ, समयबद्ध और पारदर्शी निबंधन प्रक्रिया हमारी प्राथमिकता है। सभी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जायेगा।” उन्होंने कहा अधीनस्थ अधिकारियों के साथ समन्वय कर स्पष्ट निर्देश जारी होंगे, तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं का तत्काल निराकरण होगा और अनावश्यक विलंब करने वाले कर्मियों पर झारखंड राइट टू सर्विस एक्ट के तहत कार्रवाई भी संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘कॉफी विद एसडीएम’ का उद्देश्य ही यह है कि समस्यायें सीधे सुनी जायें और वहीं से समाधान का रास्ता तय हो।
कार्यक्रम में शंभू नाथ दुबे, संजय कुमार पाठक, अवधेश प्रसाद, सुखबीर पाल, चतुर्वेदी अलख निरंजन शर्मा, नागेंद्र पांडेय, प्रणव कुमार, अमित कुमार शर्मा, मोती प्रसाद, मनोज कुमार, बद्री नारायण प्रजापति सहित 50 से अधिक नवीस मौजूद रहे। सभी के चेहरों पर एक ही उम्मीद, “अगर प्रशासन सुनने को तैयार है, तो बदलाव भी जरूर आयेगा।”






