कोहराम लाइव डेस्क : प्राचीन इमारतें और स्मारक हमारे लिए और दुनिया के लिए एक संपत्ति हैं। यह दिन सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखता है और लोगों को इसकी संवेदनशीलता और इसके महत्व को समझाता है। यह दिन मानव विरासत, विविधता और एकीकृत निर्मित स्मारकों और विरासत स्थलों को बचाए रखने की जागरुकता और इन्हें बचाए रखने का प्रण है। साथ ही, धरोहरों के संरक्षण के लिए खास प्रयास किए जाते हैं।

विश्व धरोहर दिवस का इतिहास
संरक्षित स्थलों पर जागरूकता के लिए सांस्कृतिक-ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासतों की विविधता और रक्षा के लिए 18 अप्रैल को वर्ल्ड हेरिटेज डे मनाने की शुरुआत हुई। ट्यूनीशिया में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ माउंटेन्स एंड साइट द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में 18 अप्रैल,1982 को विश्व धरोहर दिवस मनाने का सुझाव दिया गया, जिसे कार्यकारी समिति द्वारा मान लिया गया। नवंबर,1983 में यूनेस्को के सम्मेलन के 22वें सत्र में हर साल 18 अप्रैल को वर्ल्ड हेरिटेज डे मनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

World Heritage Day 2021 का थीम
इस वर्ष World Heritage Day 2021 का थीम ‘कॉम्प्लेक्स पास्ट( Complex Pasts): डाइवर्स फ्यूचर्स’ (Diverse Futures )है। हमारे इतिहास में सब कुछ सकारात्मक या अच्छा नहीं रहा है। इतिहास के कुछ पन्नों को बेहद हिंसक कहना गलत नहीं होगा। शायद उन्हें भूल जाना सबसे अच्छा है। एक समुदाय इतिहास को इस तरह से सोच सकता है, अन्य लोग इसे दूसरे दृष्टिकोण से देख सकते हैं। स्मारक का निर्माण इसका इतिहास का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाता है, जिसे देखने का एक महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है।

कैसे किया जाता है धरोहरों का संरक्षण
किसी भी धरोहर को संरक्षित करने के लिए दो संगठनों अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद और विश्व संरक्षण संघ द्वारा आकलन किया जाता है। फिर विश्व धरोहर समिति से सिफारिश की जाती है। समिति वर्ष में एक बार बैठती है और यह निर्णय लेती है कि किसी नामांकित संपदा को विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित करना है या नहीं। विश्व विरासत स्थल समिति चयनित खास स्थानों, जैसे-वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन या शहर इत्यादि की देख-रेख यूनेस्को से सलाह करके करती है।

ऐसे मनाया जाता है विश्व धरोहर दिवस
आजकल धरोहरों के संरक्षण के लिए संपूर्ण विश्व में बहुत सारे संगठन काम करते हैं। ऐसे में विश्व धरोहर दिवस पर हेरिटेज वॉक, फोटो वॉक आदि का आयोजन होता है। कई सारे लोग धरोहरों की यात्रा करते हैं, उनके बारे में जानकारी जुटाते हैं और उनके संरक्षण की शपथ भी लेते हैं। कोरोनाकाल में लेकिन यह सब करना बहुत मुश्किल हो चुका है। ऐसे में सारे कार्यक्रम ऑनलाइन ही होते हैं। धरोहरों के ऑनलाइन टूर्स करवाए जाते हैं।






