Delhi : देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पेट्रोल पर विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22, E27 और E30 पेट्रोल के मानकों को अधिसूचित कर दिया है। इतना ही नहीं, सरकार ने इन ईंधनों पर एक्साइज ड्यूटी में भी राहत दी है। लेकिन इस फैसले के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है, क्या भारत की मौजूदा गाड़ियां E30 पेट्रोल के लिये तैयार हैं?
क्या होता है E30 पेट्रोल?
E30 का मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 70 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल और 30 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया गया हो। एथेनॉल गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम होगा और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
E20 पर ही शुरू हो गई थीं शिकायतें
देश के कई हिस्सों में E20 पेट्रोल पहले से उपलब्ध है और 2023 के बाद लॉन्च हुई अधिकांश नई गाड़ियां इसके अनुरूप बनाई जा रही हैं। हालांकि, कई वाहन मालिकों ने सोशल मीडिया और उपभोक्ता मंचों पर माइलेज घटने की शिकायतें की हैं। लोगों का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों का माइलेज 10 से 20 प्रतिशत तक कम हुआ है।ऐसे में E30 पेट्रोल आने के बाद माइलेज में और गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
पुरानी गाड़ियों के लिये बन सकती है मुसीबत
विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल की प्रकृति सामान्य पेट्रोल से अलग होती है। यह वातावरण से नमी सोखता है, जिससे पुराने इंजनों, फ्यूल पंप, रबर पाइप, इंजेक्टर और अन्य पुर्जों पर असर पड़ सकता है। भारत में 2023 से पहले बनी बड़ी संख्या में गाड़ियां E10 ईंधन को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई थीं। ऐसे में E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण का लंबे समय तक इस्तेमाल इन वाहनों के लिए चुनौती बन सकता है।
ऑटो कंपनियों के सामने नई परीक्षा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, E30 ईंधन के प्रभावी उपयोग के लिये फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) तकनीक की जरूरत होगी। इसके लिये वाहन निर्माताओं को इंजन ट्यूनिंग, फ्यूल सिस्टम और कई अन्य तकनीकी बदलाव करने होंगे। फिलहाल ऑटोमोबाइल कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं, लेकिन बड़े स्तर पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का बाजार अभी शुरुआती दौर में ही है।
तो क्या अभी E30 के लिये तैयार है भारत?
सीधा जवाब है, अभी पूरी तरह नहीं। सरकार ने फिलहाल E30 पेट्रोल के लिये मानक और नियम तय किये हैं। लेकिन इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले वाहन उद्योग, ईंधन वितरण प्रणाली और उपभोक्ताओं को भी तैयार करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन आम हो सकते हैं, लेकिन तब तक सरकार को E10 और E20 जैसे विकल्प भी उपलब्ध रखने होंगे, ताकि करोड़ों पुराने वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
आगे क्या होगा?
भारत तेजी से हरित ईंधन की ओर बढ़ रहा है। E30 पेट्रोल उस यात्रा का अगला पड़ाव है। हालांकि यह बदलाव पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिये महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वाहन उद्योग और आम उपभोक्ता इस नई व्यवस्था के साथ कितनी तेजी से खुद को ढाल पाते हैं। फिलहाल इतना तय है कि आने वाले दिनों में भारतीय सड़कों पर सिर्फ गाड़ियां ही नहीं, ईंधन का स्वरूप भी तेजी से बदलने वाला है।
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