Patna : पटना की सर्द होती शाम में राजनीति की तपिश फिर बढ़ गई, जब रोहिणी आचार्य ने आज एक बार फिर अपनी वेदना को ज़ुबान दी। आंखों की नमी, आवाज में टूटन और शब्दों में तल्ख सच्चाई, हर बात ने यह साफ कर दिया कि पारिवारिक दरारें अब सियासत की दीवारों तक गूंज रही हैं। रोहिणी ने कहा,“मैंने जो कुछ भी कहा, वह सच कहा। कोई झूठ नहीं बोला मैंने, जो मेरे साथ हुआ, वही दुनिया से साझा किया।” जब उनसे चप्पल से मारने वाले का नाम पूछा गया तो उन्होंने तीर की तरह शब्द फेंके, “नाम मुझसे मत पूछिये… तेजस्वी यादव, संजय यादव, राहेल यादव और रमीज से जाइये पूछिये, सब पता चल जायेगा।” उनकी आंखों की थरथराती पलकों में कहीं दर्द था और कहीं दहाड़ने को उठता गुस्सा। रोहिणी ने कहा, “मेरे पिता हमेशा मेरे साथ खड़े रहे हैं… कल मेरी वजह से मेरी मां और बहनें रो पड़ीं। मैं खुशकिस्मत हूं कि ऐसे माता-पिता मिले।” रोहिणी ने कहा कि “जिस परिवार में भाई होते हैं, वहां त्याग हमेशा बहनों से ही क्यों मांगा जाता है?” उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने भाई को अभी-अभी अस्वीकार किया है। अब वह मुंबई के अपने ससुराल लौट रही हैं। “मेरी सास मेरी हालत सुनकर बेहद चिंतित हैं, उन्होंने बुला लिया है, मैं उन्हीं के पास जा रही हूं।”
लालू परिवार के इस ‘घरेलू भूचाल’ ने राजनीति में भूचाल ला दिया है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने सीधा हमला करते हुये मीडिया से कहा कि “रोहिणी बिहार की बेटी है, उसकी आंखों के आंसू केवल परिवार के नहीं, बिहार के भी अशुभ संकेत हैं।” उन्होंने कहा कि “जिस बेटी ने अपनी किडनी देकर पिता की जान बचाई, उसके साथ अन्याय होता देखकर लालू जी की चुप्पी बेहद हैरान करती है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी आवास में रोहिणी के साथ ‘भाषाई हिंसा’ हुई, जो बिहार की परंपरा और मर्यादा दोनों के खिलाफ है और फिर उन्होंने लालू परिवार के राजनीतिक हृदय पर निशाना साधते हुये कहा कि “10 सर्कुलर रोड वाला आवास भ्रष्टाचार का किला बन चुका है, इसे खाली कर तुरंत महुआबाग के निर्माणाधीन मॉल में शिफ्ट हो जाना चाहिये।”




