जिस तरह सलाद में कई सब्जियां होती हैं, ठीक इसी तरह फ्रूट सैलड ट्री पर कई तरह के फल उगते हैं। इस पर 6 से 8 तरह के एक ही प्रजाति के फल उग सकते हैं जैसे खट्टा फल नींबू, संतरा, चकोतरा आदि।

सबसे पहले फ्रूट सैलड ट्री को ऑस्ट्रेलिया में ही सफलतापूर्वक उगाया गया। 1990 के शुरुआती दशक में ऑस्ट्रेलिया के जेम्स और केरी वेस्ट ने यह आइडिया पेश किया था। बाद में ऑस्ट्रेलिया से ये पेड़ दुनिया के अन्य हिस्सों में पहुंचे। फ्रूट सैलड ट्री को खुले मैदान में या फिर गमले में उगाया जा सकता है।

मुख्य रूप से फ्रूट सैलड ट्री चार प्रकार के होते हैं। जिनके नाम स्टोन फ्रूट (stone fruit), सिट्रस फ्रूट (citrus fruit), मल्टि ऐपल (multi apple) और मल्टि नाशी (multi nashi) है। स्टोन फ्रूट ट्री में बेर, खूबानी, आड़ू और शफतालू को उगाया जा सकता है। गर्म जलवायु में इसकी पैदावार अच्छी होती है। सिट्रस फ्रूट सैलड ट्री पर नींबू, संतरा, चकोतरा, टैंगलो, पोमेलो, मैंडरिन आदि के फल उगाए जा सकते हैं। मल्टि ऐपल ट्री में तरह के सेब जैसे हरे, पीले और लाल सेब की पैदावार हो सकती है।

फ्रूट सैलड ट्री का फायदा यह है की छोटी सी जगह में आप कई फल उगा सकते हैं। खामी यह है कि इसमें अलग प्रजाति के फल जैसे सेब और केला की एक साथ पैदावार नहीं हो सकती।

इस पेड़ को रात भर में एक बाल्टी पानी में भिगोकर रखा जाता है। फिर जमीन में बड़ा सा सुराख करना पड़ता है। जड़ों को फैलाकर पेड़ को सुराख में डालना होता है। ठंडी और गर्मी के मौसम में साल में दो बार उसमें खाद डाली जाती है। पेड़ रोपने के 6 से 18 महीने के अंदर पेड़ पर फल लगते हैं।












